AI पर सरकार का बड़ा कदम, डीपफेक समेत खतरों से निपटने के लिए नियमों पर मंथन

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को लेकर नियमों की दिशा में अगला कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि सरकार अगले महीने AI से जुड़े नियमों पर एक परामर्श पत्र जारी करेगी। इसमें खास तौर पर AI सुरक्षा और डीपफेक जैसी चुनौतियों पर ध्यान दिया जाएगा।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि AI के नियमन पर तैयार होने वाले चर्चा पत्र का मुख्य आधार सुरक्षा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डीपफेक अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है, क्योंकि लोग कई बार नकली या भ्रामक सामग्री को वास्तविक मान लेते हैं। इससे गलत धारणाएं बनने के साथ लोग गलत सूचनाओं के आधार पर निर्णय भी ले सकते हैं।
टेक्नोलॉजी और कानून दोनों का होगा इस्तेमाल
मंत्री ने कहा कि AI को सिर्फ कानून बनाकर नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए तकनीकी उपायों और नियामक व्यवस्था को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने इसे ‘टेक्नो-लीगल समाधान’ की जरूरत बताया।
प्रस्तावित परामर्श पत्र में केवल नियमन ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, सुरक्षा और समावेशी AI विकास जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI तकनीक के विस्तार के दौरान समाज का कोई वर्ग पीछे न छूटे।
उद्योग की भी होगी अहम भूमिका
वैष्णव के अनुसार AI से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में उद्योग जगत की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। इस प्रक्रिया में उद्योग, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों की भागीदारी पर भी जोर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकार पहले ही इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है। इनमें डीपफेक, भ्रामक सूचना, एल्गोरिदमिक पक्षपात और AI से होने वाले संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।
सरकार इंडियाएआई मिशन के तहत ‘सेफ एंड ट्रस्टेड AI’ पहल पर भी काम कर रही है। इसके अंतर्गत डीपफेक की पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित AI, एल्गोरिदमिक पक्षपात कम करने और AI जोखिमों के आकलन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।
अब अगले महीने आने वाले परामर्श पत्र से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भारत में AI के सुरक्षित इस्तेमाल और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नियामक व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी।



