रेलवे के विस्तार को मिलेगी रफ्तार, 9,450 करोड़ की 4 परियोजनाओं को कैबिनेट की हरी झंडी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश में रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कुल 13,041 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें चार मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाएं और बिहार में एक चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना शामिल है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से मंजूर की गई चार रेलवे परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेल नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर अतिरिक्त रेल क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।
चार राज्यों में बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी
सरकार के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इन चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इससे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन में तेजी आएगी।
इनमें खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन सबसे बड़ी परियोजना है। 173 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर करीब 3,352 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन के लिए 1,583 करोड़ रुपये, गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी एवं चौथी लाइन के लिए 2,229 करोड़ रुपये और कटक-पारादीप तीसरी एवं चौथी लाइन परियोजना के लिए 2,286 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
हर साल 76 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की उम्मीद
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ रेल नेटवर्क का विस्तार करना नहीं, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाली यात्री और माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए रेलवे की क्षमता बढ़ाना भी है।
अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से भीड़भाड़ कम होगी, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा मिलेगी। इन परियोजनाओं से करीब 76 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।
इन रेल मार्गों पर कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसे प्रमुख माल की आवाजाही होती है।
पीएम गतिशक्ति के तहत होगा विकास
इन परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा। इससे मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों को भी बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना है। रेलवे के अनुसार, क्षमता विस्तार से करीब 13 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी और लगभग 65 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। यह पर्यावरणीय लाभ करीब 2.60 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया गया है।
केंद्र सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से रेल परिवहन की क्षमता बढ़ने के साथ राज्यों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, माल परिवहन अधिक सुगम होगा और औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।



