छत्तीसगढ़ में डिजिटल राजस्व क्रांति: अब घर बैठे मिलेंगी खसरा-बी1 और नामांतरण जैसी सुविधाएं

रायपुर | 30 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग ने आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए भूमि और राजस्व सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अब लोगों को खसरा, बी-1, नामांतरण सहित अन्य कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को ‘सुशासन’ की दिशा में अहम बताते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होगी।
वहीं राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया कि विभाग की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव किया जा रहा है। डिजिटल सिस्टम के जरिए मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके तहत डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) के जरिए राज्य में आधुनिक राजस्व तंत्र विकसित किया जा रहा है।
क्या मिलेगी नई सुविधा
- अब नागरिक घर बैठे खसरा और बी-1 की डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति मुफ्त डाउनलोड कर सकेंगे
- जमीन से जुड़े किसी भी बदलाव की जानकारी SMS अलर्ट के जरिए मिलेगी
- नामांतरण प्रक्रिया अब पंजीयन के साथ ही स्वतः शुरू होगी
- मोबाइल ऐप के जरिए कहीं से भी जमीन का रिकॉर्ड देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा
- बैंक में गिरवी जमीन की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी
डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता
राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों से ऑनलाइन जोड़ दिया गया है, जिससे कार्य में तेजी आई है। वहीं प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत हजारों गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग की जा चुकी है।
आंकड़ों में प्रगति
- 20,286 गांवों के खसरा रिकॉर्ड कंप्यूटरीकृत
- 19,694 गांवों के नक्शे डिजिटल
- 18,959 गांवों में जियोरेफरेंसिंग पूर्ण
- 155 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम तैयार
असर्वेक्षित गांवों पर फोकस
राज्य के 1,089 गांवों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 गांवों के नक्शे उपलब्ध करा दिए गए हैं। साथ ही कई गांवों का डेटा ‘भुईयां’ और ‘भू-नक्शा’ सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।



