नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा, छत्तीसगढ़ बन रहा मॉडल राज्य

रायपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 128वें संविधान संशोधन के तहत पारित यह कानून संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है। 16 अप्रैल 2026 की राजपत्र अधिसूचना के बाद यह कानून अब लागू होने की प्रक्रिया में है, जिससे राजनीतिक ढांचे में बड़ा परिवर्तन तय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक सुधार बताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ इसे महिला-नेतृत्व वाले विकास के मजबूत आधार के रूप में आगे बढ़ा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व की मुख्य भूमिका में स्थापित करना है।
सरकार ने पंचायत स्तर से लेकर शहरी निकायों तक जागरूकता अभियान शुरू करने की रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ घोषित किया गया है, जिसके तहत महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी को लेकर व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण को आर्थिक मजबूती देने के लिए ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ा है।
नई दिल्ली और रायपुर में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलनों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत से संसद तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ही विकसित भारत की असली पहचान बनेगी।
बस्तर क्षेत्र में भी महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नक्सल प्रभाव में कमी के बाद यहां सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई संभावनाएं बन रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को महिला नेतृत्व आधारित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बना सकता है।



