नवरात्रि में मां दुर्गा को क्यों चढ़ाया जाता है गुड़? जानिए धार्मिक और स्वास्थ्य लाभ

नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें अलग-अलग प्रकार के भोग अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा को गुड़ अत्यंत प्रिय है। खासकर नवरात्रि की सातवीं देवी मां कालरात्रि सहित सभी नौ देवियों को गुड़ चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। ऐसा करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां को गुड़ की मिठाई, गुड़ का हलवा, गुड़ के लड्डू या सादा गुड़ का भोग लगाते हैं। कई स्थानों पर गुड़ को घी के साथ मिलाकर भी अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे मां प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही व्रत रखने वाले लोगों को इससे ऊर्जा और पोषण भी मिलता है।
धार्मिक महत्व के अलावा गुड़ सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में गुड़ को प्राकृतिक मिठास का अच्छा स्रोत बताया गया है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन B6 और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं।
नवरात्रि में व्रत रखने के दौरान कई लोगों को थकान, कमजोरी और सिरदर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में गुड़ का सेवन तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है और खून की कमी यानी एनीमिया से बचाव में मदद करता है। इसके अलावा गुड़ पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है और आंतों को साफ रखने में सहायक होता है।
गर्मी के मौसम में भी गुड़ का सेवन फायदेमंद माना जाता है। गुड़ को पानी या छाछ में मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक मिलती है, प्यास कम लगती है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है। साथ ही यह गैस, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं को भी कम करने में मदद करता है।
आयुर्वेद के अनुसार गुड़ में मौजूद प्राकृतिक खनिज शरीर का तापमान संतुलित बनाए रखते हैं, जिससे गर्मी के मौसम में भी शरीर में कमजोरी महसूस नहीं होती। इस तरह चैत्र नवरात्रि में गुड़ का भोग जहां आस्था का प्रतीक है, वहीं यह स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं माना जाता।



