मिडिल ईस्ट संकट पर इमैनुएल मैक्रों का बयान—ईरान हमले रोककर हालात संभाले

नई दिल्ली : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर मध्य पूर्व के देशों पर हो रहे हमलों को रोकने की अपील की है। इस बातचीत की जानकारी मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
मैक्रों ने बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति से स्पष्ट रूप से कहा कि क्षेत्र के देशों के खिलाफ ईरान की ओर से हो रहे हमले तुरंत बंद किए जाएं। उनके मुताबिक ईरान द्वारा सीधे या किसी अन्य के माध्यम से किए जा रहे हमले, जिनका असर लेबनान और इराक जैसे देशों पर भी पड़ रहा है, स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस अपने हितों, क्षेत्रीय साझेदारों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है और किसी भी तरह की धमकी को स्वीकार नहीं करेगा।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र में लगातार बढ़ता तनाव पूरे मध्य पूर्व को अस्थिरता की ओर धकेल रहा है और इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति की सबसे बड़ी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है। मैक्रों के अनुसार, क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए एक नए राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे की जरूरत है। ऐसा ढांचा यह सुनिश्चित करे कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके और उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम तथा अस्थिरता बढ़ाने वाली गतिविधियों से पैदा होने वाले खतरों को भी खत्म किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य होनी चाहिए और वहां नेविगेशन की आजादी बहाल करना जरूरी है।
मैक्रों ने ईरान से यह भी आग्रह किया कि वहां हिरासत में रखे गए फ्रांसीसी नागरिक सेसिल कोहलर और जैक्स पेरिस को जल्द रिहा कर सुरक्षित फ्रांस लौटने दिया जाए। दोनों को मई 2022 में ईरान यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
मैक्रों की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फ्रांस ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है। पेरिस ने पूर्वी भूमध्य सागर और लाल सागर में कई युद्धपोत, दो एम्फीबियस हेलीकॉप्टर कैरियर और विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को तैनात करने की योजना बनाई है, ताकि सहयोगी देशों को समर्थन दिया जा सके और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने उम्मीद जताई थी कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देश होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग मार्गों की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजकर सहयोग करेंगे।



