प्रधानमंत्री की जनसभा से पहले सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, मुख्य मंच हटाने का निर्देश

कोलकाता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 मार्च को होने वाली प्रस्तावित मेगा रैली से पहले कोलकाता का ब्रिगेड परेड ग्राउंड सुरक्षा के लिहाज से एक किले में तब्दील हो गया है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रैली के लिए बने मुख्य स्टेज को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। यह कदम प्रधानमंत्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए स्टेज के नीचे की मिट्टी की सतह की गहराई से जांच करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सुरक्षा कारणों से मिट्टी की जांच पर जोर
मंगलवार दोपहर को SPG के उच्च अधिकारियों ने रैली स्थल का दौरा किया और जमीन के नीचे किसी भी संभावित खतरे को भांपने के लिए विस्तृत स्कैनिंग की जरूरत बताई। पिछले तीन दिनों से भाजपा नेता राजू बंद्योपाध्याय की देखरेख में एक विशाल हैंगर स्ट्रक्चर के भीतर मुख्य मंच तैयार किया गया था। अब सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत इस पूरे ढांचे के नीचे की जमीन की जांच की जाएगी। हालांकि, भाजपा आयोजकों के लिए समय एक बड़ी चुनौती है, लेकिन उनका मानना है कि बैरिकेड्स और साउंड सिस्टम जैसे अन्य प्रबंध पूरे हो चुके हैं, जिससे जांच के बाद स्टेज को फिर से तैयार किया जा सकता है।
परिवर्तन यात्रा का होगा भव्य समापन
भाजपा नेताओं ने 7 मार्च को ही ब्रिगेड मैदान में भूमि पूजन किया था, जिसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और बंगाल प्रभारी सुनील बंसल समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री की यह रैली पश्चिम बंगाल में भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ के समापन का प्रतीक है। पूरे प्रदेश में घूम रहे 9 परिवर्तन रथों का कारवां कोलकाता पहुंचेगा, जहाँ पीएम मोदी एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे और कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है यह रैली
पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अपनी जड़ें काफी मजबूत की हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी 3 सीटों से बढ़कर 77 सीटों तक पहुंची थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 18 से घटकर 12 रह गईं, लेकिन पार्टी का वोट शेयर अब भी स्थिर बना हुआ है। भाजपा नेतृत्व 2021 और 2024 की कमियों को दूर कर इस रैली के जरिए आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की तैयारी में है। प्रशासनिक बैठकों के बाद होने वाली यह जनसभा बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।



