विश्व मात्स्यिकी दिवस पर मत्स्य किसानों को बड़ी सौगात, मंत्री रामविचार नेताम बोले– छत्तीसगढ़ बनेगा मत्स्य उत्पादन का हब

रायपुर : विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम सभागार में आयोजित एक दिवसीय मत्स्य कृषक संगोष्ठी में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मछलीपालन मंत्री रामविचार नेताम शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका, खाद्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और समुदाय सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है।
मंत्री नेताम ने बताया कि राज्य के स्थापना के 25 वर्षों में प्राकृतिक जल संसाधनों की प्रचुरता के कारण मत्स्य विकास की अपार संभावनाएँ बनी हैं। राज्य में कुल 1,30,001 जल स्त्रोत उपलब्ध हैं, जिनमें से 98 प्रतिशत में मत्स्य पालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 3571 किलोमीटर नदीय जलक्षेत्र और 7580 हेक्टेयर अतिरिक्त निजी जलक्षेत्र सघन मत्स्य पालन को गति दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में 6वें स्थान पर पहुंच गया है। अब तक 82 नवीन हैचरियों के निर्माण सहित 120 हैचरियों के माध्यम से प्रति वर्ष 583 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे राज्य आत्मनिर्भर बना है और अन्य राज्यों को निर्यात भी कर रहा है।
विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 1008 मोटर साइकल, आइस बॉक्स, 10 फी व्हीलर, 05 इन्सुलेटेड ट्रक और 114 वाहन वितरित किए गए हैं। साथ ही रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार स्थापित किए गए हैं। कार्यक्रम में हितग्राहियों को लाभांश राशि के चेक भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, मछलीपालन विभाग के संचालक एमएस नाग और अन्य वक्ताओं ने भी संबोधन दिया। बताया गया कि वर्तमान में 1840 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से 63,280 सदस्य मत्स्य पालन से जुड़े हैं और आधुनिक तकनीक पर प्रशिक्षण निरंतर जारी है।
संगोष्ठी में मछुआ समुदाय, जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में मत्स्य किसानों ने सहभागिता दर्ज की।


