ईरान की कूटनीतिक जीत: UN में अमेरिका की तमाम कोशिशें हुईं विफल

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में चल रही परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से जुड़ी एक महीने लंबी अहम बैठक की शुरुआत इस बार राजनीतिक सरगर्मियों के बीच हुई है। बैठक के शुरुआती चरण में ही उपाध्यक्ष पदों के चयन को लेकर बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जिसमें ईरान को भी उपाध्यक्षों की सूची में शामिल किया गया है।
जानकारी के अनुसार, इस बार कुल 34 देशों के प्रतिनिधियों को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही वियतनाम को बैठक का अध्यक्ष चुना गया है, जिसे चीन और रूस के करीबी देशों में माना जाता है। इस चयन प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को उपाध्यक्ष पद से बाहर रखने के लिए अंतिम समय तक प्रयास किए, लेकिन कई देशों के समर्थन के कारण यह प्रस्ताव सफल नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि 120 से अधिक देशों ने इस प्रक्रिया में ईरान का समर्थन किया, जिससे उसका नाम सूची में शामिल हो गया।
ईरान ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वह हमेशा परमाणु हथियारों के प्रसार के खिलाफ रहा है और उसका रुख शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर आधारित है। वहीं, उसने अमेरिका पर राजनीतिक दबाव और गलत आरोप लगाने का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने इस निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे देशों को महत्वपूर्ण पदों पर शामिल करना, जिन पर विवादित परमाणु गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं, एनपीटी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
वहीं ईरान की ओर से पलटवार करते हुए उसके प्रतिनिधियों ने कहा कि इतिहास में अमेरिका स्वयं परमाणु हथियारों का उपयोग कर चुका है, ऐसे में उसे नैतिकता के आधार पर अन्य देशों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
गौरतलब है कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की स्थापना 1970 में की गई थी, जिसका उद्देश्य दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। वर्तमान में इसके 190 से अधिक सदस्य देश हैं और यह संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में काम करती है।



