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ईवी क्रांति का साल बना 2025, सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं से उद्योग को मिली नई दिशा

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नई दिल्ली: वर्ष 2025 भारत के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए अहम साबित हुआ, जब भारी उद्योग मंत्रालय की नीतियों और योजनाओं ने ईवी सेक्टर को मजबूत आधार दिया। सरकारी प्रोत्साहन, निवेश में बढ़ोतरी और नई पहलों के चलते देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को व्यापक स्वीकार्यता मिली।

पीएलआई योजना से बढ़ा निवेश और उत्पादन
ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना ने ईवी मैन्युफैक्चरिंग को नई गति दी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 के दौरान इस योजना के अंतर्गत कंपनियों को लगभग दो हजार करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस दौरान लाखों इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, कारें और बसें इंसेंटिव के दायरे में आईं, जिससे घरेलू उत्पादन और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिला।

पीएम ई-ड्राइव से तेज हुआ ईवी अपनाने का अभियान
सितंबर 2024 में शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव योजना ने देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। सरकार ने इसके लिए 10,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया, जिसका फोकस ईवी खरीद को बढ़ावा देने, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने पर रहा।

लाखों उपभोक्ताओं को मिली खरीद में राहत
ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी के माध्यम से 28 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसमें सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की है, जबकि तिपहिया और इलेक्ट्रिक ट्रकों को भी योजना का लाभ मिला है। अब तक इस योजना के अंतर्गत लाखों ईवी की बिक्री दर्ज की जा चुकी है।

शहरी परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों पर जोर
सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को हरित बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। हजारों इलेक्ट्रिक बसें शहरों में चलाने की योजना पर काम तेज है, जिससे प्रदूषण कम करने और ईंधन लागत घटाने में मदद मिलेगी। इसके लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

प्रमुख शहरों में शुरू होगी ई-बस सेवा
सरकारी एजेंसी सीईएसएल ने देशभर में ई-बस संचालन के लिए बड़ी निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले चरण में दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों में इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी।

भारत को ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी
सरकार ने इलेक्ट्रिक कार निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक अलग नीति भी लागू की है, जिसका उद्देश्य विदेशी निवेश आकर्षित करना और देश को वैश्विक ईवी मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस पहल के तहत कंपनियों को बड़े पैमाने पर निवेश और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना होगा।

मेक इन इंडिया से मजबूत होगा ईवी उद्योग
नई नीतियों को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान से जोड़ा गया है, जिससे न सिर्फ घरेलू उत्पादन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

 

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Kailash Jaiswal

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