RO.NO. 01
Health

वरुण मुद्रा अभ्यास से सेहत में सुधार, पाचन से लेकर जोड़ों तक असरदार

नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में मोबाइल और स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल, गलत खानपान, पानी की कमी और मानसिक तनाव सेहत पर सीधा असर डाल रहे हैं। इसका प्रभाव सबसे पहले शरीर के उन हिस्सों पर दिखता है, जो संतुलन और नमी पर निर्भर होते हैं—जैसे त्वचा, पेट और जोड़। त्वचा का बेजान होना, बार-बार पेट खराब रहना, गैस, एसिडिटी और जोड़ों में जकड़न अब आम समस्याएं बनती जा रही हैं।

इन स्थितियों से निपटने के लिए आयुष मंत्रालय नियमित रूप से योग और योग मुद्राओं को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता है। योग मुद्राएं शरीर के पंच तत्वों को संतुलित करने का सरल माध्यम मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक है वरुण मुद्रा, जिसे विशेष रूप से शरीर के जल तत्व को संतुलित करने वाली मुद्रा कहा जाता है।

योग शास्त्र के अनुसार, मानव शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—इन पांच तत्वों से बना होता है। जब इनमें से जल तत्व असंतुलित हो जाता है, तो उसका असर त्वचा की नमी, पाचन प्रक्रिया और जोड़ों की लचक पर दिखाई देता है। वरुण मुद्रा इसी असंतुलन को धीरे-धीरे सुधारने में सहायक मानी जाती है।

त्वचा से जुड़ी समस्याओं में वरुण मुद्रा का अभ्यास खास लाभकारी बताया जाता है। शरीर में पानी की कमी और बाहरी प्रदूषण त्वचा को रूखा और बेजान बना देते हैं। नियमित रूप से इस मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर के भीतर नमी का स्तर बेहतर होता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक लौटने लगती है और ड्राइनेस की समस्या कम महसूस होती है।

पाचन से जुड़ी परेशानियों—जैसे कब्ज, गैस और पेट भारी रहने—में भी वरुण मुद्रा सहायक मानी जाती है। जल तत्व के संतुलन से पाचन तंत्र को बेहतर काम करने में मदद मिलती है। इससे आंतों की सक्रियता बढ़ती है और पेट साफ रहने में आसानी होती है।

जो लोग जोड़ों के दर्द या अकड़न से परेशान रहते हैं, उनके लिए भी यह मुद्रा उपयोगी हो सकती है। शरीर में पर्याप्त नमी रहने से जोड़ों के बीच घर्षण कम होता है, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है। नियमित अभ्यास से जोड़ों की लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, एसिडिटी, सीने में जलन और अपच जैसी समस्याओं में भी वरुण मुद्रा लाभ पहुंचा सकती है। यह मुद्रा पेट के अंदर के वातावरण को शांत रखने और पाचन संतुलन को बेहतर करने में सहायक मानी जाती है।

वरुण मुद्रा करने की विधि
किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर आराम से बैठ जाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। हाथ की छोटी उंगली और अंगूठे के सिरे को हल्के से आपस में मिलाएं, बाकी उंगलियां सीधी रखें। आंखें बंद कर सामान्य गति से गहरी सांस लेते रहें। इस मुद्रा का अभ्यास रोजाना 15 से 20 मिनट तक किया जा सकता है।

नियमित अभ्यास और सही जीवनशैली के साथ वरुण मुद्रा शरीर को भीतर से संतुलित रखने में मदद कर सकती है और कई रोजमर्रा की समस्याओं में राहत दिला सकती है।

 

Share this

Kailash Jaiswal

"BBN24 News - ताजा खबरों का सबसे विश्वसनीय स्रोत! पढ़ें छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया की ब्रेकिंग न्यूज, राजनीति, खेल, व्यवसाय, मनोरंजन और अन्य अपडेट सबसे पहले।"

Related Articles

Back to top button