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कच्चे तेल की तेजी से बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 1352 अंक टूटा; निवेशकों के 8 लाख करोड़ स्वाहा

मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार खत्म होने तक बीएसई सेंसेक्स 1,352.74 अंक यानी करीब 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,566.16 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 422.40 अंक यानी 1.73 प्रतिशत टूटकर 24,028.05 के स्तर पर बंद हुआ।
दिनभर के कारोबार में ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार का रुख कमजोर बना रहा। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी ऑटो करीब 4.10 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक लगभग 3.97 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, प्राइवेट बैंक, मेटल, पीएसई, ऑयल एंड गैस और इंडिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में भी 2 से 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि आईटी सेक्टर में हल्की मजबूती देखने को मिली और निफ्टी आईटी मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
बाजार में कमजोरी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप-100 इंडेक्स करीब 1,127 अंक गिरकर 56,265.50 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 इंडेक्स लगभग 366 अंक की गिरावट के साथ 16,132.20 पर आ गया।
इस बीच बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स भी तेजी के साथ ऊपर चढ़ा और करीब 17.50 प्रतिशत बढ़कर 23.36 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
सेंसेक्स की कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एसबीआई, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, टाइटन, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर सन फार्मा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे कुछ आईटी और फार्मा शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
तेज बिकवाली का असर बाजार की कुल पूंजी पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये घटकर लगभग 441 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले सत्र में करीब 449 लाख करोड़ रुपये था।
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक कारक भी जिम्मेदार रहे। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया और यह लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी बाजार पर दबाव बनाया। डॉलर इंडेक्स इस साल के उच्चतम स्तर करीब 99.70 तक पहुंच गया, जिसके चलते भारतीय रुपये पर भी दबाव देखा गया। विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक संकेतों की कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।



