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खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट पर खतरा: क्या खाड़ी को बचाने आगे आएगा भारत?

नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित लंबे युद्ध को लेकर खाड़ी देशों में पानी के गंभीर संकट की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक अगर युद्ध के दौरान खारे पानी को मीठा बनाने वाले डीसैलिनेशन प्लांट निशाना बनते हैं, तो सऊदी अरब, दुबई (यूएई), कतर और बहरीन समेत पूरे खाड़ी क्षेत्र में पेयजल का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
खाड़ी देशों में प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बहुत कम हैं, इसलिए यहां समुद्री खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र ही जीवनरेखा माने जाते हैं। 1970 के दशक के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में ऐसे करीब 450 डीसैलिनेशन प्लांट लगाए गए हैं। अगर ये संयंत्र किसी हमले में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो करोड़ों लोगों के लिए पेयजल की आपूर्ति ठप पड़ सकती है।
पानी को रणनीतिक संसाधन मानती है CIA
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी CIA ने चेतावनी दी है कि यदि सैन्य संघर्ष लंबा चलता है तो पानी एक भू-रणनीतिक संसाधन बन सकता है और यह युद्ध की दिशा तक बदल सकता है। CIA ने 1980 के दशक में ही अपने आकलन में कहा था कि खाड़ी के कई देशों के लिए तेल से भी ज्यादा जरूरी संसाधन पानी है।
रियाद की सप्लाई पर मंडरा सकता है खतरा
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के तट पर स्थित जुबैल डीसैलिनेशन प्लांट पर सबसे ज्यादा खतरा बताया जा रहा है। यहां से करीब 500 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए राजधानी रियाद को लगभग 90 प्रतिशत पेयजल की आपूर्ति होती है। 2008 में विकीलीक्स के खुलासे में भी कहा गया था कि यदि इस पाइपलाइन या संबंधित ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो रियाद को एक सप्ताह के भीतर खाली कराना पड़ सकता है।
ईरान सॉफ्ट टारगेट को बना सकता है निशाना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो ईरान बदले में खाड़ी देशों के ऊर्जा केंद्रों, हवाई अड्डों और पानी के संयंत्रों जैसे सॉफ्ट टारगेट पर हमला कर सकता है। ऐसा होने पर पूरे क्षेत्र में पेयजल की आपूर्ति बाधित हो सकती है।
मुंबई-दुबई अंडरवॉटर रेल लिंक का प्रस्ताव
इस बीच एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित मुंबई-दुबई अंडरवॉटर रेल लिंक भविष्य में खाड़ी देशों के लिए मददगार साबित हो सकता है। बताया गया है कि इस परियोजना के जरिए यात्रियों के साथ-साथ तेल और पानी की सप्लाई भी संभव हो सकती है और ट्रेन की रफ्तार 600 से 1000 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा हालात में खाड़ी देशों के लिए पानी की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है और किसी भी सैन्य टकराव में यह एक अहम रणनीतिक मुद्दा बन सकता है।



