आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

कोंडागांव। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप बस्तर में वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय जनसहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं तथा वर्षों से बंद विद्यालयों में पुनः कक्षाएँ संचालित हो रही हैं।
राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम समारोह में उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव – राज्यपाल रमेन डेका
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर विश्व के सामने प्रस्तुत करते हैं। गौर नृत्य, परघौनी, धुरवा, मुरिया और लेजा नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि लोककला तभी जीवित रह सकती है जब कलाकार खुशहाल होंगे। बस्तर पंडुम कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर प्रदान करेगा।
बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आगमन बस्तर के लिए आशीर्वाद और जनजातीय समाज के लिए सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन-दर्शन की भूमि है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष बस्तर पंडुम में 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जो बस्तर की सांस्कृतिक जीवंतता को दर्शाता है।
अब नया बस्तर: डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटियाँ बज रही हैं। गणतंत्र दिवस पर अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र की जीत है।
विकास योजनाएँ बनीं परिवर्तन की आधारशिला
नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान को विकास के मील के पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के माध्यम से भटके हुए लोग सम्मानपूर्वक मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह प्रमाण हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं।
कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। इस अवसर पर केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।






