जया एकादशी का पुण्य पर्व: इस दुर्लभ संयोग में पूजा करने से पूर्ण होंगी मनोकामनाएं

Jaya Ekadashi 2026 : सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है, लेकिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी जया एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की उपासना करने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि जन्म-जन्मांतर के कष्टों से भी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यहां तक कि प्रेत योनि जैसे गंभीर दुखों से छुटकारा मिलने की भी मान्यता है।
वर्ष 2026 की जया एकादशी और भी खास होने जा रही है, क्योंकि इस दिन एक साथ चार दुर्लभ और अत्यंत फलदायी योगों का निर्माण हो रहा है, जो इसे अत्यंत शुभ बना रहे हैं।
जया एकादशी पर बन रहे हैं चार विशेष योग
ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो इस वर्ष जया एकादशी पर—
- इंद्र योग
- रवि योग
- भद्रावास योग
- शिवावास योग
का अद्भुत संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इन योगों में किया गया पूजा-पाठ, व्रत और दान कई गुना फल प्रदान करता है।
रवि योग को कष्टों और बाधाओं का नाश करने वाला माना गया है, वहीं शिवावास योग जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करता है।
कब रखा जाएगा जया एकादशी व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को शाम 4:34 बजे होगी और इसका समापन 29 जनवरी 2026 को सुबह 1:56 बजे होगा।
उदय तिथि के मान से जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
जया एकादशी की सरल पूजा विधि
यदि आप जीवन के कष्टों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं, तो जया एकादशी पर इस विधि से पूजा करें—
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें
- भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प लें
- पीले वस्त्र से सजे आसन या चबूतरे पर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें
- पीले पुष्प, फल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें
- पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें
- भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना श्रीहरि प्रसाद स्वीकार नहीं करते
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- जया एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विधि से जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, पुण्य लाभ और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की अनुभूति होती है।



