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2028 का लक्ष्य तय: ‘चंद्रयान-4’ से भारत रचेगा नया इतिहास

अहमदाबाद : अहमदाबाद केंद्र के निदेशक निलेश एम. देसाई ने अंतरिक्ष अभियानों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर होता है, इसलिए वहां संचालित होने वाले मिशनों की योजना विशेष तकनीकी तैयारी के साथ बनाई जाती है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि इसरो का अगला बड़ा चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-4’ है, जिस पर लगभग 2000 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है। एजेंसी को उम्मीद है कि यह मिशन वर्ष 2028 तक प्रक्षेपित किया जा सकेगा। यह अभियान चंद्र सतह पर करीब 100 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा। मिशन में लैंडर भारत द्वारा विकसित किया जाएगा, जबकि रोवर जापान के सहयोग से तैयार होगा। देसाई ने आगे कहा कि मंगल ग्रह तक पहुंचना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन वहां का वातावरण लैंडिंग के लिहाज से अपेक्षाकृत अनुकूल माना जाता है। पृथ्वी से मंगल तक पहुंचने में लगभग 10 महीने का समय लगता है। इसके अलावा इसरो शुक्र ग्रह (वीनस) मिशन पर भी काम कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य शुक्र के वातावरण और जलवायु को समझना है, ताकि पृथ्वी के बदलते पर्यावरण और जलवायु संकट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जा सकें।
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Kailash Jaiswal

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