सतत विकास और खेल महोत्सव – राह दिखाता, राजनांदगांव का कोलिहापुरी गाँव

राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले का छोटा सा गाँव कोलिहापुरी आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है। यहाँ पर खेती, शिक्षा और सामुदायिक विकास के साथ-साथ खेल महोत्सव की परंपरा ने गाँव की पहचान बदल दी है।
हर साल अगस्त महीने में धान की रोपाई के अंत पर पोला उत्सव के साथ-साथ वार्षिक खेल महोत्सव का आयोजन होता है। नीम के पेड़ की छांव में गाँव की युवा समितियाँ आलू दौड़, बेल दौड़, फुगड़ी, मटका फोड़, गेड़ी, रस्साकशी जैसे खेलों का आयोजन करती हैं। यह आयोजन केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि आपसी एकता, जमीनी नेतृत्व और सहयोग का उत्सव बन चुका है।
कोलिहापुरी गाँव की इस प्रगति में रिलायंस फाउंडेशन की अहम भूमिका रही है। 2012-13 में यहाँ ग्राम संघ की स्थापना कर सामूहिक विकास की नींव रखी गई। गाँव ने सबसे पहले पानी को अपनी प्राथमिक ज़रूरत माना और 2.5 किलोमीटर लंबी लिफ्ट इरिगेशन पाइपलाइन बिछाई गई। इसके लिए जल उपयोगकर्ता समूह भी बनाया गया, जो आज भी प्रणाली का प्रबंधन करता है। इस पहल से 80 से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। किसान अब साल में तीन फ़सलें – चना, गेहूँ और मूंग – उगा रहे हैं।
कोलिहापुरी का ग्राम विकास कोष भी आत्मनिर्भरता का उदाहरण है। किसानों के योगदान से बने इस कोष ने पिछले पाँच सालों में ₹2.80 लाख की राशि जुटा ली है। आपातकालीन जरूरतों और कृषि इनपुट के लिए यह कोष आज ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा का काम कर रहा है।
खेती और शिक्षा के साथ-साथ खेल महोत्सव ने गाँव को नई पहचान दी है। कक्षा 8 की छात्रा जया वर्मा बताती हैं – “मुझे खेल बहुत पसंद हैं, पिछले साल मैंने फुगड़ी में पहला पुरस्कार जीता था। पूरे साल मैं इस दिन का इंतज़ार करती हूँ।”
गाँव के किसान दानिश वर्मा कहते हैं – “पहले एक ही फसल के लिए संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन लिफ्ट इरिगेशन की वजह से अब हमारी पैदावार दोगुनी हो गई है और यह सिस्टम पड़ोसी गाँवों में भी अपनाया जा रहा है।”
आज कोलिहापुरी न केवल खेती और शिक्षा में बल्कि सामुदायिक नेतृत्व व खेलों में भी मिसाल बन चुका है। यहाँ खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रगति, एकता और सहयोग का प्रतीक हैं।
जैसे देश राष्ट्रीय खेल दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, वैसे ही कोलिहापुरी जैसे गाँव यह संदेश दे रहे हैं कि खेल और सतत विकास मिलकर ही एक सशक्त व एकजुट समाज का निर्माण कर सकते हैं।