
मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ को लेकर बाजार में चर्चा तेज है। दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। इसके जरिए कंपनी 30,188 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसे देश के सबसे बड़े आईपीओ के रूप में पेश किया जा रहा है।
एंकर निवेशकों से मिला जोरदार रिस्पॉन्स
कंपनी ने एंकर निवेशकों के लिए 8,110 करोड़ रुपये का बुक साइज तय किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके मुकाबले 30 गुना से अधिक की बोलियां प्राप्त हुईं। विदेशी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों, सॉवरेन वेल्थ फंड्स, पेंशन फंड्स और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इसमें रुचि दिखाई।
विदेशी निवेशकों में ब्लैकरॉक, फिडेलिटी, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेम्पलटन और कैपिटल ग्रुप जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। वहीं, घरेलू स्तर पर एसबीआई, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एचडीएफसी, कोटक और निप्पॉन इंडिया जैसे म्यूचुअल फंड्स के साथ बीमा कंपनियों की भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है।
रिटेल निवेशकों के लिए कितना निवेश जरूरी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खुदरा निवेशक न्यूनतम एक लॉट यानी 12 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इसके लिए 13,428 रुपये निवेश करने होंगे। अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए बोली लगाने का विकल्प बताया गया है।
GMP से लिस्टिंग की उम्मीदें
ग्रे मार्केट में जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर का प्रीमियम करीब 250 से 252 रुपये प्रति शेयर बताया गया है। इसके आधार पर संभावित लिस्टिंग मूल्य लगभग 1,371 रुपये रहने का अनुमान जताया जा रहा है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक होता है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है। यह लिस्टिंग मूल्य या मुनाफे की गारंटी नहीं देता।
टेलीकॉम के साथ AI और क्लाउड पर फोकस
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस समूह के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार का प्रमुख हिस्सा है। इसके अंतर्गत रिलायंस जियो इन्फोकॉम भी आती है, जिसके 50 करोड़ से अधिक ग्राहक होने की बात कही गई है। कंपनी टेलीकॉम सेवाओं के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड सर्विसेज और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी विस्तार पर ध्यान दे रही है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात: आईपीओ में आवेदन करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज, इश्यू प्राइस, जोखिम कारक और वित्तीय स्थिति की जांच जरूर करें। केवल GMP के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं है।



