
भाटापारा:बलौदाबाजार जिले में मारपीट के एक फरार आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस द्वारा मात्र 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया जाना अब चर्चा और सवालों के घेरे में आ गया है। यह घटना कहीं न कहीं पुलिस व्यवस्था की कमजोर कार्यशैली और सुस्त रवैये को उजागर करती नजर आ रही है।
ज के डिजिटल युग में, जहां अत्याधुनिक तकनीक, सर्विलांस सिस्टम, मुखबिर तंत्र और इंटेलिजेंस एजेंसियां सक्रिय हैं, वहीं जिले का ही एक आरोपी वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाता है और पुलिस उसे पकड़ने के लिए इनाम घोषित करने पर मजबूर दिखती है। यह स्थिति आम जनता के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आरोपी स्थानीय है, तो आखिरकार वह पुलिस की पकड़ से इतनी आसानी से कैसे दूर हो गया? क्या जिले का खुफिया तंत्र निष्क्रिय हो चुका है या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं?
10 हजार रुपये का इनाम घोषित करना जहां एक ओर औपचारिकता पूरी करने जैसा प्रतीत हो रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पूरे मामले को हास्यास्पद बना रहा है। लोगों का कहना है कि यह कदम पुलिस की मजबूरी नहीं बल्कि नाकामी को ढकने का एक प्रयास भर है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाती है और फरार आरोपी को कब तक पकड़ पाती है, या फिर यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।




