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PRAGATI के जरिए परियोजना प्रबंधन में क्रांति, पारदर्शिता और निगरानी से मिली गति

भारत में लंबे समय तक बड़ी सरकारी परियोजनाएं देरी, बढ़ती लागत और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की शिकार रहीं। चाहे रेलवे परियोजनाएं हों, राष्ट्रीय राजमार्ग, बिजली संयंत्र या हवाई अड्डे—अधिकांश योजनाएं तय समय से काफी पीछे खिसक जाती थीं। इसकी सबसे बड़ी वजह विभिन्न मंत्रालयों, केंद्र और राज्यों तथा राज्यों के भीतर विभागों के बीच प्रभावी तालमेल का अभाव था।
जब समस्या बनी व्यवस्था, तब आया प्रणालीगत समाधान
सार्वजनिक परियोजनाओं में लगातार हो रही देरी किसी एक विभाग या अधिकारी की विफलता नहीं थी, बल्कि यह एक गहरी संरचनात्मक समस्या थी। अलग-अलग मंत्रालयों के बीच संवाद की कमी, केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय का अभाव तथा राज्य स्तर पर विभागीय असंगति ने विकास की गति को धीमा कर दिया था। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PRAGATI को एक तकनीक-संचालित और परिणामोन्मुख शासन मंच के रूप में पेश किया।
2015 से शुरू हुआ नया प्रशासनिक प्रयोग
25 मार्च 2015 को PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे शासन प्रणाली को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और समयबद्ध बनाने का माध्यम बताया। उस समय भारत वैश्विक स्तर पर निवेश और विकास के नए अवसरों की ओर बढ़ रहा था, और ऐसे में परियोजनाओं का समय पर पूरा होना बेहद अहम था।
एक मंच, कई उद्देश्य
PRAGATI का मुख्य लक्ष्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके तहत तीन प्राथमिक उद्देश्यों पर काम किया गया—बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आ रही रुकावटों को दूर करना, कमजोर प्रदर्शन वाली प्रमुख सरकारी योजनाओं को सुधारना और नागरिक शिकायतों का समयबद्ध समाधान। यह प्रणाली पारंपरिक समीक्षा बैठकों से अलग है, क्योंकि यह एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर परियोजना निगरानी, योजना क्रियान्वयन और शिकायत निवारण को जोड़ती है। इसमें PM GatiShakti, PARIVESH और PM Reference Portal जैसे अहम डिजिटल टूल्स का एकीकरण किया गया है।
प्रधानमंत्री की सीधी निगरानी बना निर्णायक तत्व
PRAGATI को प्रभावी बनाने वाला सबसे बड़ा कारक यह है कि इसकी समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं। इन बैठकों में राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्र सरकार के वरिष्ठ सचिव सीधे शामिल होते हैं। सामान्य मुद्दों का समाधान विभागीय स्तर पर किया जाता है, जबकि जटिल मामलों को चरणबद्ध तरीके से PRAGATI मंच तक लाया जाता है।
फैसले सिर्फ कागजों तक नहीं
PRAGATI की खासियत इसका सख्त फॉलो-अप सिस्टम है। समीक्षा के बाद लिए गए निर्णयों की निगरानी कैबिनेट सचिवालय करता है, जबकि मंत्रालयों और योजनाओं पर प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी नजर रहती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निर्णयों का वास्तविक क्रियान्वयन हो और वे फाइलों में दबकर न रह जाएं।
आंकड़ों में दिखती सफलता
PRAGATI और PMG पोर्टल के आंकड़े इसकी प्रभावशीलता को साफ दर्शाते हैं। अब तक 3,300 से अधिक परियोजनाओं की निगरानी की जा चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों की 61 प्रमुख योजनाओं और शिकायतों की समीक्षा की गई। कुल 7,735 मुद्दों में से 7,156 का समाधान किया गया, जिससे समाधान दर 90 प्रतिशत से ज्यादा रही।
वर्षों से अटकी परियोजनाओं को मिली नई रफ्तार
PRAGATI के हस्तक्षेप से कई ऐसी परियोजनाएं आगे बढ़ीं, जो दशकों से लंबित थीं। जम्मू–उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक, जिसे 1994 में मंजूरी मिली थी, PRAGATI समीक्षा के बाद गति पकड़ सकी और जून 2025 में शुरू हुई। इसी तरह नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो 2007 से अटका हुआ था, दिसंबर 2025 में चालू किया गया। ब्रह्मपुत्र पर बना बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल भी PRAGATI के बाद 2018 में पूरा हो पाया।
वैश्विक मंच पर भी मिली सराहना
PRAGATI मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सईद बिजनेस स्कूल द्वारा दिसंबर 2024 में प्रकाशित अध्ययन में इसे एक प्रभावशाली डिजिटल गवर्नेंस मॉडल बताया गया। अध्ययन के अनुसार, PRAGATI ने वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही बढ़ाई है और बुनियादी ढांचे व सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं को निर्णायक गति दी है।
शासन व्यवस्था की स्थायी कड़ी
अब तक 50 उच्चस्तरीय समीक्षाओं के साथ PRAGATI एक प्रयोग भर नहीं, बल्कि शासन की स्थायी प्रणाली बन चुका है। यह पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध निर्णय को प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बना रहा है। जैसे-जैसे भारत विकास और निवेश के बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, PRAGATI यह सुनिश्चित करने वाला मजबूत आधार बनकर उभरा है कि योजनाएं सिर्फ घोषित न हों, बल्कि समय पर जमीन पर उतरें।



