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रेलवे कर्मचारियों के लिए नया नियम: रिटायरमेंट पर अब नहीं मिलेगा गोल्ड प्लेटेड चांदी का सिक्का

Railway Employee New Rule: रेलवे प्रशासन ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़ा एक अहम निर्णय लिया है। करीब दो दशकों से चली आ रही वह परंपरा अब समाप्त कर दी गई है, जिसके तहत सेवानिवृत्त होने वाले रेल कर्मियों को सम्मान स्वरूप गोल्ड प्लेटेड चांदी का सिक्का भेंट किया जाता था। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद इस फैसले को औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है और संबंधित आदेश भी जारी हो चुके हैं।

अब तक रिटायरमेंट के समय लगभग 20 ग्राम वजनी सोने की परत चढ़ा चांदी का सिक्का कर्मचारियों को स्मृति चिह्न के रूप में दिया जाता था। यह परंपरा कर्मचारियों की सेवाओं को सम्मान देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन नए निर्देशों के अनुसार अब यह व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी गई है।

कब और क्यों शुरू हुई थी यह व्यवस्था

रेलवे में यह परंपरा वर्ष 2006 में लागू की गई थी। रेलवे बोर्ड द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले या निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को यह सिक्का प्रदान किया जाता था, ताकि उन्हें गरिमापूर्ण विदाई दी जा सके।

परंपरा समाप्त करने के पीछे क्या कारण रहे

रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय के पीछे मुख्य रूप से दो वजहें सामने आई हैं।
पहला कारण सिक्के की लागत में लगातार हुई वृद्धि है। वर्ष 2006 में जहां इस स्मृति चिह्न की कीमत लगभग 1,000 रुपये थी, वहीं वर्तमान समय में यह बढ़कर करीब 10,000 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा था।

दूसरा कारण गुणवत्ता से जुड़े गंभीर सवाल हैं। हाल के समय में यह सामने आया कि कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दिए गए सिक्कों में मानक के अनुरूप चांदी नहीं थी। जांच में यह भी पाया गया कि कई सिक्कों में चांदी की मात्रा बेहद कम थी और वे अधिकतर तांबे से बने हुए थे। इन शिकायतों के बाद इस पूरी व्यवस्था पर पुनर्विचार किया गया।

आदेश किस स्तर से हुआ जारी

राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। साथ ही इस विषय से जुड़े पूर्व के सभी आदेशों को निरस्त कर दिया गया है।

नए नियम के लागू होने के बाद अब रेलवे में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को यह स्मृति चिह्न नहीं दिया जाएगा, और सम्मान समारोह की प्रक्रिया को नए सिरे से तय किया जाएगा।

 

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Kailash Jaiswal

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