जन गण मन के समान वंदे मातरम पर भी दिखाना होगा आदर, खड़ा होना अनिवार्य

नई दिल्ली: केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को जन गण मन के समान औपचारिक दर्जा और सम्मान दिलाने के लिए प्रोटोकॉल बनाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे पर उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें राष्ट्रीय गीत के सम्मान और गायन के तरीके पर विस्तार से चर्चा हुई।
वर्तमान में संविधान के अनुसार, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों को समान सम्मान प्राप्त है, लेकिन कानूनी रूप से उनमें अंतर है। राष्ट्रगान के समय खड़े होना अनिवार्य है और इसका उल्लंघन राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत दंडनीय है। वहीं, वंदे मातरम के समय खड़ा होना या किसी विशेष मुद्रा अपनाने के लिए कोई लिखित नियम नहीं हैं।
सूत्रों ने बताया कि बैठक में इन सवालों पर चर्चा हुई:
- क्या वंदे मातरम के गायन के समय खड़ा होना अनिवार्य किया जाए?
- क्या गाने के समय, स्थान और तरीके के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं?
- क्या राष्ट्रीय गीत का अपमान करने वालों के लिए दंडात्मक प्रावधान होने चाहिए?
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब सरकार वंदे मातरम का साल भर चलने वाला उत्सव मना रही है। राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने ऐतिहासिक रूप से वंदे मातरम के महत्व को कम किया, जबकि कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी राजनीतिक एजेंडा के तहत इतिहास को तोड़-मरोड़ रही है।
वंदे मातरम का इतिहास भी गौरवपूर्ण है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा यह गीत 1905-08 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान आजादी का प्रतीक बनकर उभरा। अब सरकार इसे पुनः उसी सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मुद्दे पर पहले भी याचिकाएं दायर हुई हैं, जिसमें वंदे मातरम के लिए राष्ट्रगान जैसी ही कानूनी रूपरेखा बनाने की मांग की गई थी। 2022 में केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि राष्ट्रीय गीत के लिए अभी तक कोई दंडात्मक प्रावधान या औपचारिक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।



