भारत की अर्थव्यवस्था: FY26 में 7.4% की वृद्धि दर, मौद्रिक नीति में स्थिरता की उम्मीद

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, देश की GDP वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वृद्धि में बिजली की मांग में इजाफा, खनन और निर्माण गतिविधियों में तेजी जैसे कारक मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही, लेकिन दूसरी छमाही में यह 7 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है। इसका कारण प्रतिकूल आधार प्रभाव और निर्यात में कमी बताया गया है।
तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहीं। त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता मांग बढ़ने, ब्याज दरों में कटौती और कुछ सेक्टरों में सीजनल तेजी के कारण उत्पादन और खपत में सुधार देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी मांग और जीएसटी में कटौती से मैन्युफैक्चरिंग वॉल्यूम और वस्तुओं एवं सेवाओं की खपत पर सकारात्मक असर पड़ा।
आईसीआरए ने यह भी अनुमान जताया कि RBI फरवरी 2026 में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, और भविष्य में वित्त वर्ष 27 के बजट, महंगाई और वृद्धि दर की गतिशीलता को देखते हुए ही नए फैसले लिए जाएंगे।
महंगाई दर में कमी के संकेत भी हैं। वित्त वर्ष 26 में खुदरा महंगाई 2 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि नवंबर 2025 में यह 0.7 प्रतिशत तक बढ़ी। इसका मुख्य कारण फूड और बेवरेज में अपस्फीति में कमी बताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीमेंट उत्पादन में 6.5-7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, स्टील की मांग पिछले कुछ सालों में मजबूत वृद्धि के बाद 7-8 प्रतिशत तक सीमित रहने की उम्मीद है। बिजली की मांग में वृद्धि 1.5-2 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है, मौसमी बदलाव और खनन व निर्माण गतिविधियों की धीमी गति को देखते हुए।
आईसीआरए की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था FY26 में स्थिर वृद्धि पथ पर रहेगी, जबकि कुछ सेक्टरों में वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।



