
भाटापारा: निपनिया धान खरीदी केंद्र में धान के बोरों में रेत, कंकड़ और धूल-मिट्टी मिलाने के वायरल वीडियो और इस मामले को बी बी एन 24 न्यूज द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद आखिरकार सहकारिता विभाग हरकत में आया और धान खरीदी केंद्र के प्रभारी लीलाराम सेन को पद से बर्खास्त कर दिया गया। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित निपनिया द्वारा जारी आदेश में उनके कृत्य को समिति की साख को धूमिल करने वाला बताते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया है।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले की जांच को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच के दौरान बनाए गए पंचनामा में धान की कमी बताई गई थी, जबकि 8 मार्च को हुई दूसरी जांच में अचानक धान की अधिकता सामने आ गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कुछ ही दिनों में धान की कमी से अधिकता कैसे हो गई?
यह विरोधाभास जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहली जांच सही थी तो दूसरी जांच में धान की अधिकता कैसे मिल गई, और यदि दूसरी जांच सही है तो पहली जांच में कमी कैसे दर्ज हो गई। दोनों ही स्थितियों में जांच की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा हो रहा है।
वहीं क्षेत्र के कुछ लोग दबे जुबान यह भी कह रहे हैं कि प्रभारी को बर्खास्त करना सिर्फ खानापूर्ति की कार्रवाई हो सकती है, ताकि बढ़ते जनदबाव और मीडिया की खबरों को शांत किया जा सके। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर धान खरीदी केंद्र में वास्तविक स्थिति क्या है|
और गड़बड़ी के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
फिलहाल प्रभारी पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन जांच के विरोधाभासी आंकड़ों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।



