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सफेद बालों से छुटकारा: यह चीज देगी आपके बालों को नेचुरल कलर

Hair Health : अब केवल उम्र बढ़ने से ही बाल सफेद नहीं होते। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता तनाव, नींद की कमी और मोबाइल-लैपटॉप की लगातार स्क्रीन लाइट जैसे कारण कम उम्र के लोगों में भी सफेद बाल दिखने लगे हैं। पहले यह समस्या 40-50 साल की उम्र के बाद आती थी, लेकिन अब स्कूल-कॉलेज के युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

बार-बार केमिकल हेयर कलर करना न केवल समय लेने वाला है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार बाल शरीर की अंदरूनी सेहत का आईना हैं। जब शरीर में वात और पित्त का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर सीधे बालों की जड़ों पर पड़ता है। वहीं विज्ञान बताता है कि बालों का रंग मेलानिन नामक पिगमेंट से आता है। तनाव, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और पोषण की कमी के कारण मेलानिन का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे बाल सफेद होने लगते हैं।

इस समस्या के लिए सौंफ एक कारगर प्राकृतिक उपाय हो सकता है। आमतौर पर सौंफ पाचन में उपयोग होती है, लेकिन आयुर्वेद में इसे त्रिदोष नाशक माना गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनॉयड्स फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं, जो बालों की जड़ों को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाते हैं। सौंफ का यह असर बालों के समय से पहले सफेद होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है।

सौंफ का प्रयोग भी सरल है। इसे पहले पानी में भिगोकर साफ किया जाता है, फिर हल्की आंच पर भूनकर पूरी तरह जला दिया जाता है। इसके बाद इसे ठंडा करके बारीक पीस लिया जाता है। तैयार पाउडर को बालों पर लगाने से सफेद बाल अस्थायी रूप से छुप जाते हैं। असर लगभग एक दिन तक रहता है और अगली बार बाल धोने पर यह हट सकता है।

सफेद बालों की समस्या बढ़ती जा रही है, तो आयुर्वेद और विज्ञान दोनों यही सुझाव देते हैं: खानपान सुधारें, तनाव कम करें, शरीर को अंदर से मजबूत बनाएं और प्राकृतिक उपाय अपनाएं। इन बदलावों से बालों को स्वस्थ और प्राकृतिक रंग बनाए रखना संभव है।

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Kailash Jaiswal

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