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कूटनीतिक झटका: ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का आमंत्रण छीना

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को दिए गए एक अहम कूटनीतिक आमंत्रण को अचानक वापस लेकर दोनों देशों के रिश्तों में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप द्वारा हाल ही में गठित किए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए कनाडा को भेजा गया निमंत्रण अब रद्द कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने सीधे तौर पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए लिखा कि बोर्ड ऑफ पीस ने कनाडा को भेजा गया आमंत्रण वापस लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, ट्रंप ने अपने संदेश में इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की, जिससे अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

दरअसल, हाल ही में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने यह बयान दिया था कि “कनाडा अमेरिका की वजह से जीवित है।” इस टिप्पणी पर कनाडा में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कनाडा किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका और कनाडा के बीच मजबूत साझेदारी जरूर है—चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, सुरक्षा सहयोग हो या सांस्कृतिक संबंध—but कनाडा अपनी पहचान और ताकत के दम पर आगे बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की शुरुआत की है। इसके लिए दुनिया के करीब 60 देशों को आमंत्रण भेजा गया था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से लगभग 25 देशों ने इस पहल में शामिल होने की सहमति दी है। बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, मिस्र, बहरीन, मोरक्को, तुर्किए, हंगरी, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, वियतनाम और मंगोलिया सहित कई राष्ट्र शामिल हैं। इनमें आठ इस्लामिक देश भी हैं।

ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, जो गाजा में इजरायल-हमास संघर्षविराम के दूसरे चरण से जुड़ी पहल के तहत घोषित किया गया था। हालांकि, भारत की ओर से अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। विदेश मंत्रालय ने केवल इतना कहा है कि प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे जैसे कई प्रमुख देशों ने इस पहल की औपचारिक साइनिंग सेरेमनी से दूरी बनाए रखी। इसके अलावा रूस, इटली, यूक्रेन और स्लोवेनिया जैसे कुछ देशों ने भी इस निमंत्रण को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।

बताया जा रहा है कि बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य देशों का कार्यकाल तीन वर्षों का होगा और स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए करीब 1 बिलियन डॉलर की राशि देनी पड़ सकती है। कनाडा से निमंत्रण वापस लिए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का अमेरिका-कनाडा संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर क्या असर पड़ता है।

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Kailash Jaiswal

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