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छत्तीसगढ़भाटापारा

भाटापारा में कलेक्टर का औचक निरीक्षण बेनकाब: अस्पताल से मंडी तक फैली अव्यवस्था, जिम्मेदारों की खुली पोल

भाटापारा:जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब कलेक्टर कुलदीप शर्मा औचक निरीक्षण पर भाटापारा पहुंचे। निरीक्षण के दौरान सिविल अस्पताल से लेकर कृषि उपज मंडी तक अव्यवस्थाओं का ऐसा नजारा दिखा कि खुद कलेक्टर को सख्त तेवर अपनाने पड़े।
सिविल अस्पताल में निरीक्षण के दौरान लैब की हालत देखकर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सीधे सवाल दाग दिया—“क्या

इसका मतलब है कि बाहर प्राइवेट लैब चल रही है?” कर्मचारियों से ईमानदारी से जवाब मांगा गया, लेकिन हालात खुद ही बहुत कुछ बयां कर रहे थे। बीएमओ को फटकार लगाते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि व्यवस्थाएं सुधारना उनकी जिम्मेदारी है।
वहीं महिला मरीजों से बातचीत कर उन्होंने जमीनी हकीकत भी जानी।

इसके बाद कलेक्टर कृषि उपज मंडी पहुंचे, जहां किसानों का दर्द खुलकर सामने आया। किसानों ने साफ कहा कि उन्हें फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता, दलालों के भरोसे ही सौदा करना पड़ता है। दूर-दराज से आने के कारण वे मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने को विवश हैं।

मंडी सचिव से जब लाइसेंसधारी एजेंटों की संख्या और स्थानीय-बाहरी का ब्योरा मांगा गया, तो जवाब तक नहीं दे पाए। पेयजल और छांव जैसी बुनियादी सुविधाओं की शिकायत पर भी सचिव गोलमोल जवाब देते नजर आए।इसी दौरान कलेक्टर की नजर बंद पड़े शीतल पेयजल फ्रिजर पर पड़ी, जहां नल बंद था और बोरे रखे हुए थे। इस लापरवाही पर कलेक्टर भड़क उठे और एसडीएम को मंडी सचिव को नोटिस जारी करने के निर्देश दे दिए।

गौरतलब है कि 12 मार्च को भी कलेक्टर ने औचक निरीक्षण किया था, तब भी राजस्व विभाग और सिविल अस्पताल में भारी अव्यवस्थाएं मिली थीं। उस दौरान कर्मचारियों के मुख्यालय में न रहने और ट्रेन से अप-डाउन करने की बात सामने आई थी। सुधार के दावे किए गए थे, लेकिन एक माह बाद भी हालात जस के तस नजर आए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ये औचक निरीक्षण वाकई व्यवस्था सुधारने का जरिया बनेंगे, या फिर केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएंगे?

मीडिया से चर्चा के दौरान कलेक्टर ने सिविल अस्पताल की अव्यवस्था को स्वीकार करते हुए जल्द सुधार का भरोसा दिलाया। साथ ही महिला विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी को भी जल्द पूरा करने की बात कही।
लेकिन जमीनी हकीकत यही सवाल खड़ा कर रही है—
क्या इस बार बदलाव होगा, या फिर जनता को सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहेगा?

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Kailash Jaiswal

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