छत्तीसगढ़

सदन में उठा बलौदाबाजार जिले में DMF फंड की राशि में भ्रष्टाचार का मामला

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रायपुर, 18 मार्च 2023 छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में DMF फंड में बड़े भ्रष्टाचार का मामला बलौदा बाजार के विधायक प्रमोद शर्मा ने सदन में उठाया । साथ ही पूर्व नेता प्रतिपक्ष और विधायक धरमलाल कौशिक ने भी बलौदा बाजार जिले के सिमगा ब्लॉक में हुए डीएम फंड में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है । दरअसल, बलौदा बाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के उड़ेला के गौठान में बिना लेआउट व ड्राइंग के लाखों रुपए के भुगतान कर दिए गए । ऐसे में जब यह शिकायत जिले के कलेक्टर के पास पहुंची, तो कलेक्टर खुद गौठान पहुंचे और मौके का मुआयना कर जांच करने के निर्देश दिए ।आपको बता दें कि शासकीय गोठानों में स्थानीय ग्रामीण बेरोजगारों, स्व सहायता समूहों को रोजगार देने राज्य शासन द्वारा प्रारंभ ‘रीपा योजना’ में संबंधित निर्माण कार्य एजेंसियों एवं कतिपय अधिकारियों की मनमानी से भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही है। इन रूरल इंस्ट्रीयल पार्क में विभिन्न कार्यों एवं मशीनरी खरीदी कार्य हेतु डीएमएफ मद से प्राप्त राशि की जमकर बंदरबाट करते हुए योजना को पलीता लगाया जा रहा है। ऐसा ही मामला सिमगा जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम उड़ेला के  रीपा के तहत चयनित गौठान में सामने आया है। इसकी जांच के निर्देश कलेक्टर रजत बंसल ने 27 फरवरी को ग्राम उड़ेला गौठान के निरीक्षण के दौरान ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधिकारियों को दिए हैं ।इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत ग्राम पंचायत उड़ेला में कंस्ट्रक्शन शेड निर्माण भाग 1 व 2 मसाला पीसने, मसाला, चायपत्ती, जीरा आदि पैकेजिंग मटेरियल एवं पैकेजिंग डिजाईन कार्य करने हेतु मशीन क्रय करने तकनीकी स्वीकृति सितम्बर 2022 तथा प्रशासकीय स्वीकृति 10 अक्टूबर 2022 को हुई थी। पश्चात से. शेड भाग । निर्माण मद हेतु प्रथम किश्त 18,34,800 रु., भाग 2 निर्माण हेतु 19,47,600 रु मसाला पीसने, पैकेजिंग मशीन क्रय करने हेतु क्रमशः 9,59,200, 9,96,800, 10,25,600 रुपए प्रथम किश्त के रूप में जिला प्रशासन द्वारा रूप में डीएमएफ 17 अक्टूबर 2022 को DMF मद से जनपद पंचायत सिमगा के खाते में अंतरित किया गया। जनपद पंचायत सिमगा द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए राशि का अंतरण ग्राम पंचायत उड़ेला को 18 अक्टूबर 2022 को कर दिया गया। इस पर तत्परता दिखाते हुए कार्य एजेंसी सरपंच ग्राम पंचायत द्वारा रायपुर के एक फर्म को इसी तिथि में राशि ट्रांसफर कर दिया गया ।निर्माण कार्य में ले-आऊट व ड्राइंग, डिजाईन का पालन नहींकार्य एजेंसी ग्राम पंचायत वर्किंग शेड निर्माण भाग 1 व भाग 2 की राशि संबंधित फर्म को अंतरित करने के बाद शेड निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। हैरत की बात है कि ग्राम पंचायत द्वारा इस हेतु जनपद पंचायत के इंजीनियर से ले-आऊट की आवश्यकता भी नहीं समझी गई। पश्चात मनमर्जी करते हुए शेड का निर्माण बिना ड्राइंग, डिजाइन के करा दिया गया। इसका खुलासा ग्रामीणों द्वारा वहां निरीक्षण में पहुंचे कलेक्टर से की गयी शिकायत के पश्चात हुआ। यही नहीं लाखों की मशीन क्रय करने के कार्य में निविदा आमंत्रित नहीं करने का आरोप भी लगाया गया है। नियमानुसार 3 लाख रुपए के अधिक से क्रय करने पर निविदा आमंत्रण का प्रावधान है। जबकि इस कार्य हेतु क्रम किये जाने वाले मशीनों हेतु क्रमशः 23.98 लाख, 25.64 लाख, 24.92 लाख रुपए डीएमएफ मद से स्वीकृत किये गये है।अधिकारियों की लापरवाही भी उजागरजनपद पंचायत उड़ेला के गौठान में रीपा के तहत शेड निर्माण कार्य हेतु संबंधित निर्माण एजेंसी या फर्म द्वारा बिना ले-आऊट कराये निर्धारित ड्राइंग, डिजाइन के पालन किये बिना शेड निर्माण करा दिया गया। इसके बावजूद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के उपयंत्री अथवा तकनीकी स्टाफ द्वारा इसकी जानकारी जनपद पंचायत में नहीं दिया गया। जिससे इनकी कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है।डीएमएफ के नियमों, शर्तों का खुला उल्लंघनडीएमएफ के तहत निर्धारित विभिन्न शर्तों के अनुपालन पर शेड निर्माण कार्य को स्वीकृति हेतु प्रथम किश्त की राशि जिला खनिज न्यास द्वारा जारी किया गया, परंतु निर्माण एजेंसी द्वारा इन नियमों का भी भरपूर उल्लंघन किया गया। इसके चलते कार्य स्वीकृति दिनांक से 6 माह के दौरान कार्य पूर्णता की सीमा के केवल 1 माह शेष होने के बावजूद कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इसके अलावा निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना फलक भी नहीं लगाया गया है। डीएमएफ के संबंधित कार्य के अधिकारियों द्वारा यदि समय-समय पर निरीक्षण किया गया होता तो यह नौबत उत्पन्न नहीं होती। कार्य के भौतिक एवं वित्तीय प्रगति प्रतिवेदन प्रत्येक माह के 2 तारीख को जिला डीएमएफ कार्यालय में जमा करने के निर्देश को भी धता बताया गया है। इसके चलते यह महत्त्वाकांक्षी योजना अधूरी पड़ी है । जनपद सीईओ को सस्पेंड करने की मांगविधायक धरमलाल कौशिक ने सदन में मांग करते हुए मंत्री से कहा कि तत्काल जनपद पंचायत के सीईओ को सस्पेंड किया जाए, क्योंकि दिए में फंड में भ्रष्टाचार का या बड़ा मामला है ।विधायक प्रमोद शर्मा ने भी लगातार उठाया मामलाबलौदा बाजार से विधायक प्रमोद शर्मा भी लगातार बलौदा बाजार जिले में डीएम फंड में भ्रष्टाचार का मामला सदन में उठा रहे हैं प्रमोद शर्मा लगातार सदन में कह रहे हैं कि दिए में फंड के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार जिले में किया जा रहा है ।शिक्षा विभाग में भी DMF के राशि का बंदरबांट की आशंकाछत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में अब DMF के पैसे का बंदरबांट देखने को मिल रहा है । ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जो तस्वीरें बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड से आई है, वो बतलाती है कि किस प्रकार से अपने मनचाहों को नियुक्ति दिलाने के चक्कर में पूरे नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जाती है । दरअसल, जिले के कसडोल विकासखण्ड में मुख्यमंत्री के भेंट मुलाकात कार्यक्रम के पहले विकासखंड के विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों(व्यवस्था में) की नियुक्ति DMF फण्ड से की गई । इस नियुक्ति में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस नियुक्ति के लिए न तो कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही किसी प्रकार की कोई सूचना दी गई । अतिथि शिक्षकों(व्यवस्था में) की भर्ती होने के बाद बाकी लोगों को पता चला कि कोई इस प्रकार की नियुक्ति भी हुई है । ऐसे में सवाल यह उठता है कि शिक्षा जैसे प्रमुख विभाग, जिससे प्रदेश और देश का भविष्य जुड़ा हो, बिना इंटरव्यू, बिना एग्जाम, बिना बीएड-डीएड किये ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति क्यों की गई? क्या यह नियुक्ति नियम के तहत होता, तो अच्छे अभ्यर्थी का चयन नहीं होता, जिसके पास डिग्री, अनुभव के साथ बीएड और डीएड प्रशिक्षित हो और TET भी पास हो?अधिकारियों ने क्या कहा?जब इस विषय में हमने जिले के शिक्षा अधिकारी सी एस ध्रुव से इस बारे में जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कसडोल बीईओ को निर्देशित किया । कसडोल बीईओ राधे लाल जायसवाल ने जानकारी देते बताया कि अभी-अभी ट्रांसफर होने से कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी थी, ऐसे में उनकी पूर्ति के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति DMF फंड से की गई है । बीईओ जायसवाल ने जो आगे कहा वो और भी दिलचस्प है । दरअसल, विकासखंड के शिक्षा अधिकारी राधे लाल जायसवाल का कहना था कि सीएम साहब का दौरा होने वाला था…इसलिए कोई शिकायत न हो करके जल्दबाजी में धड़ा-धड़ नियुक्ति की गई, जिससे सीएम साहब के पास कोई शिकायत न हो..। अब बीईओ के इस बयान के बाद सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ सीएम के दौरे को देखते हुए ऐसे किसी भी नियुक्ति कर दी जाएगी? क्या किसी भी नियम को शिक्षा जैसे प्रमुख विभाग में नियुक्ति पर दरकिनार कर दिया जाएगा? क्या डीएड और बीएड जैसे प्रशिक्षित युवाओं को दरकिनार कर अप्रशिक्षितों की नियुक्ति कर देना जायज है? जब डीएड और बीएड के प्रशिक्षित युवा बेरोजगार बैठे है, तो क्या उनको पहले प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए?इन सब प्रश्नों का जवाब जिम्मेदार अधिकारी बीईओ से जानना चाहा, तो उनका कहना था कि हम सिर्फ यहीं चाहते थे कि सीएम साहब से कोई शिकायत न हो इसलिए नियुक्ति जल्दी की गई, अगली बार जुलाई में बकायदा विज्ञापन निकालकर नियुक्ति ली जाएगी । अब उनके बयान को देखा जाए तो क्या यह माना जाए कि अभी से लेकर परीक्षा होने तक, नॉन बीएड और डीएड धारी अतिथि शिक्षक बच्चों के भविष्य को सुधारने का काम करेंगे । सवाल और भी गंभीर हो जाता है, जब बीईओ कहते हैं कि प्रशिक्षितों युवा नहीं मिले इसलिए अप्रशिक्षितों की नियुक्ति कर दी गई । आप जब विज्ञापन जारी करेंगे नहीं, कोई आवेदन आएगा नहीं, तो आपको कैसे पता चल जाएगा कि प्रशिक्षित अभ्यर्थी मिले नहीं ।आंकड़े क्या?छत्तीसगढ़ में बीएड और डीएड प्रशिक्षितों की संख्या काफी ज्यादा है । जब हमने बीएड-डीएड प्रशिक्षित संघ के एक युवा से बात की तो उन्होंने बताया कि कसडोल विकासखंड में ही लगभग 4 से 5 हज़ार की संख्या में डीएड और बीएड प्रशिक्षित युवा आपको मिल जाएंगे ।ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह युवा सिर्फ अपनी डिग्री अपने पास रखेंगे और कसडोल विकासखंड में अप्रशिक्षितों को नियुक्ति मिल जाएगी ।

DMF की प्रमुख बातें

■ DMF की स्थापना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) (MMDR) संशोधन अधिनियम 2015 के तहत की गई थी।

■ वे खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों के हित और लाभ के लिए काम करने के लिए गैर-लाभकारी ट्रस्ट हैं ।

■ उद्देश्य-खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों के हित के लिए इस प्रकार कार्य करना कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।

■ क्षेत्राधिकार : इसका संचालन करने का तरीका संबंधित राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।