राष्ट्रपति के अभिभाषण से बजट सत्र की शुरुआत, संसद में गूंजी विकास की उपलब्धियां

नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने बीते वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया और आने वाले वर्षों के लिए देश की दिशा और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि हाल का वर्ष भारत के लिए प्रगति, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक रहा। उन्होंने राष्ट्रगान से जुड़े ऐतिहासिक पड़ावों और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अवसर देश की एकता और सामूहिक स्मृति को मजबूत करते हैं।
इतिहास से प्रेरणा, भविष्य की तैयारी
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत के महापुरुषों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी विभूतियों को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र ने गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती और सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत से जुड़े आयोजनों के माध्यम से अपने मूल्यों को दोहराया है। इन आयोजनों ने युवाओं में राष्ट्रनिर्माण की भावना को और मजबूत किया है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र में हुए आयोजनों ने देश को विविधता में एकता के सूत्र से जोड़ने का कार्य किया है, जिससे राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा मिली है।
विकसित भारत की ओर बढ़ता देश
भविष्य की दिशा पर बात करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2026 भारत के लिए एक नए चरण की शुरुआत का संकेत है। उन्होंने कहा कि इस शताब्दी के शुरुआती वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत स्तर पर मजबूत आधार तैयार किया है।
पिछले एक दशक में हुए प्रयासों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शासन, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाला समय भारत को विकसित राष्ट्र के लक्ष्य के और करीब ले जाएगा।
संसद की भूमिका पर जोर
राष्ट्रपति ने सांसदों से लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए संसदीय कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही ‘विकसित भारत’ का संकल्प साकार हो सकता है।


