अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा, 114 राफेल और 6 P-8I विमानों को हरी झंडी

नई दिल्ली। देश की वायु और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों और भारतीय नौसेना के लिए 6 लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की है। इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े रक्षा आधुनिकीकरण कदमों में गिना जा रहा है।
वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल श्रेणी के विमानों से उसकी लड़ाकू क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। ये 4.5 पीढ़ी के अत्याधुनिक विमान आधुनिक रडार, लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और सटीक प्रहार क्षमता से लैस हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार, नए विमानों की तैनाती से वायुसेना को अतिरिक्त स्क्वाड्रन मिलेंगे, जिससे उसकी परिचालन क्षमता और सामरिक तैयारी मजबूत होगी। वर्तमान में वायुसेना अपने स्वीकृत स्क्वाड्रन स्तर से कम संख्या के साथ काम कर रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए तेज प्रतिक्रिया, लंबी दूरी की मारक क्षमता और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली से लैस विमानों की आवश्यकता बढ़ी है। प्रस्तावित सौदे के बाद अंतिम मंजूरी के लिए मामला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।
इसी के साथ नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त पी-8आई समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी विमानों की खरीद को भी स्वीकृति मिली है। ये विमान हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी, पनडुब्बियों की पहचान और लंबी दूरी की गश्त में अहम भूमिका निभाते हैं। भारतीय नौसेना पहले से ऐसे विमानों का संचालन कर रही है और उनका रिकॉर्ड विश्वसनीय रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय भारत की समग्र रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने और बहु-आयामी खतरों से निपटने की रणनीति का हिस्सा है। वायु और समुद्री दोनों मोर्चों पर क्षमताओं के विस्तार से सशस्त्र बलों को तकनीकी बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



