बीजापुर में नक्सलवाद को बड़ा झटका, 12 नक्सलियों ने हथियारों समेत किया आत्मसमर्पण

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। जिले में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत 12 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन नक्सलियों पर संगठन में उनकी भूमिका के आधार पर कुल 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
यह आत्मसमर्पण 5 फरवरी 2026 को ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के अंतर्गत हुआ। नक्सलियों ने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज, बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव और केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर के डीआईजी बी.एस. नेगी सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सरेंडर किया।
हथियार और विस्फोटक किए सुपुर्द
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने एके-47, एसएलआर राइफल, मैगजीन, कारतूस सहित बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री सुरक्षा बलों को सौंपी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये सभी माओवादी लंबे समय से आगजनी, आईईडी ब्लास्ट, नक्सली फायरिंग और अन्य गंभीर घटनाओं में शामिल रहे हैं।
पुरुष और महिला कैडरों का मिश्रित समूह
सरेंडर करने वालों में 4 पुरुष और 8 महिला नक्सली शामिल हैं। इनमें संगठन के अलग-अलग स्तर के कैडर थे, जिनमें कंपनी नंबर 2 के सदस्य, डीवीसीएम, एसीएम, पीपीसीएम, पीएलजीए सदस्य और पार्टी सदस्य शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण नक्सली संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
संविधान देकर किया स्वागत
बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का संविधान की प्रति देकर मुख्यधारा में स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति और विकास योजनाएं अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी साबित हो रही हैं, जिससे माओवादी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
आंकड़ों में दिख रहा बदलाव
पुलिस के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से अब तक बस्तर संभाग में करीब 888 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इस अवधि में 231 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जबकि 1163 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी रणनीति की सफलता और क्षेत्र में लौटती शांति का संकेत हैं।



