ट्रंप की व्यापार नीति से बदला समीकरण, EU-इंडिया समिट में आर्थिक समझौतों पर चर्चा

नई दिल्ली | अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने के संकेतों के बीच भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में नई गर्माहट देखने को मिल रही है। वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं के दौर में दोनों पक्ष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की प्रतिनिधि काजा कल्लास ने भारत–EU संबंधों को नए मोड़ पर ले जाने के संकेत दिए हैं।
यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए काजा कल्लास ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात पहले से कहीं अधिक जटिल और अस्थिर हो चुके हैं। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ का मिलकर काम करना केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वर्ष 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ का शीर्ष नेतृत्व भारत का विशेष अतिथि बन सकता है। इसी यात्रा के दौरान 16वीं भारत–EU शिखर वार्ता के आयोजन की संभावना जताई जा रही है।
कल्लास ने कहा कि भारत यूरोप के लिए एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापार, सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और जन-स्तरीय संपर्कों को नई ऊंचाई देने के लिए एक व्यापक और मजबूत कार्ययोजना पर काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था युद्ध, दबाव की राजनीति और आर्थिक ध्रुवीकरण से जूझ रही है, तब भारत और यूरोपीय संघ जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों का एक-दूसरे के करीब आना बेहद जरूरी हो जाता है। उनके अनुसार, दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और प्रभावी बहुपक्षीय सहयोग को मजबूती दें।
सूत्रों के मुताबिक, आगामी शिखर बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच तीन बड़े समझौतों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। इनमें व्यापार, सुरक्षा सहयोग और लोगों की आवाजाही से जुड़े करार शामिल हैं। 27 जनवरी को भारत–EU व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की संभावना है, जिससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, व्यापारिक अड़चनें कम होंगी और क्लीन टेक्नोलॉजी, दवा उद्योग तथा सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, दोनों पक्ष सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं। इससे समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयास और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सूचना सुरक्षा को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू किए जाने की भी तैयारी है।
लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए भारत और EU श्रमिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कौशल वाले पेशेवरों की आवाजाही को सरल बनाने पर भी सहमति बना रहे हैं। इसके तहत एक व्यापक मोबिलिटी फ्रेमवर्क के अंतर्गत समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।



