होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर बनी सहमति, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की संभावना

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब कूटनीतिक मोर्चे पर नरमी के संकेत मिलने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर एक प्रारंभिक ढांचा तैयार किया गया है। यदि इस पर सहमति बनती है, तो जल्द ही दोनों देशों के बीच सीजफायर लागू हो सकता है। इस प्रस्ताव में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की संभावना भी जताई जा रही है।
पाकिस्तान की बैकचैनल कूटनीति
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में पाकिस्तान एक अहम बैकचैनल के रूप में उभरा है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने “टू-लेयर” रणनीति वाला एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत पहले चरण में तत्काल युद्धविराम लागू करने और दूसरे चरण में एक व्यापक शांति समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने का खाका शामिल है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से साझा किया गया है और इसे आगे चलकर औपचारिक सहमति पत्र (MoU) का रूप दिया जा सकता है।
45 दिन के अस्थायी युद्धविराम पर चर्चा
इससे पहले Axios की एक रिपोर्ट में भी करीब 45 दिनों के संभावित अस्थायी युद्धविराम पर बातचीत का जिक्र किया गया था। माना जा रहा है कि यह कदम आगे चलकर स्थायी शांति समझौते का आधार बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। प्रस्ताव के मुताबिक, पहले तत्काल सीजफायर लागू किया जाए, फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए और लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर व्यापक समझौते को अंतिम रूप दिया जाए। इस संभावित समझौते को फिलहाल अनौपचारिक तौर पर “इस्लामाबाद अकॉर्ड” कहा जा रहा है।
ईरान की शर्तें भी सामने
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने यह साफ संकेत दिया है कि वह स्थायी युद्धविराम तभी स्वीकार करेगा जब उसे भविष्य में अमेरिका और इज़रायल की ओर से किसी सैन्य कार्रवाई का खतरा न होने की गारंटी मिले। इसके साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और उसके फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करने जैसे मुद्दे भी वार्ता का हिस्सा बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस पूरे प्रस्ताव पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिका और अन्य संबंधित देशों की तरफ से भी औपचारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
वैश्विक बाजारों की निगाहें
यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अगर यह संभावित समझौता लागू होता है, तो इससे न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।



