मकर संक्रांति के पावन पर्व पर बन रहा महासंयोग, जानिए कौन-सा दान दिला सकता है सौभाग्य और सफलता

Hindu Festival : 14 जनवरी का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष माना जा रहा है। इस दिन मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संगम बन रहा है, जिसे हिंदू परंपरा में अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। ऐसा संयोग कम ही देखने को मिलता है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। इस समय को पुण्य, तप और दान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि उत्तरायण में किए गए व्रत, पूजा और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस दिन सूर्य की उपासना, जल अर्पण, अन्न दान और गुड़-तिल से बनी वस्तुओं के दान का विशेष महत्व बताया गया है।

इसी दिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। शास्त्रों के अनुसार ‘षटतिला’ का अर्थ है तिल का छह अलग-अलग तरीकों से प्रयोग। तिल को पवित्रता, समृद्धि और पाप नाश का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी पर तिल से जुड़े कर्म करने से आर्थिक संकट दूर होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

षटतिला एकादशी पर तिल का उपयोग छह विधियों से किया जाता है। इनमें तिल मिले जल से स्नान करना, शरीर पर तिल का लेप लगाना, हवन में तिल की आहुति देना, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल का दान करना, व्रत के दौरान तिल से बने भोजन का सेवन करना तथा तिल मिश्रित जल का पान या पितरों को तर्पण करना शामिल है। मान्यता है कि इन उपायों से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को एकादशी तिथि शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ हो जाएगी। बुधवार के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, इस समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। अनुराधा नक्षत्र 15 जनवरी की सुबह 3 बजकर 3 मिनट तक प्रभावी रहेगा और चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे। इस दिन सूर्योदय प्रातः 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 5 बजकर 45 मिनट पर होगा।



