पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष ने कलेक्टर से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति, निलंबन और नोटिस की कार्रवाई से आहत होने का दावा

मुंगेली। प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच मुंगेली जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिलाध्यक्ष के. किशन महिलांग ने कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। उन्होंने अपने पत्र में निलंबन की कार्रवाई और जिले के पटवारियों को जारी कारण बताओ नोटिस को मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।
कलेक्टर को 5 नवंबर 2026 को लिखे पत्र में जिलाध्यक्ष ने उल्लेख किया है कि राजस्व पटवारी संघ अपनी विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं के निराकरण के लिए 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। प्रांतीय निर्देश के अनुसार मुंगेली जिले के पटवारी भी आंदोलन में शामिल हैं। इसी बीच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मुंगेली द्वारा 4 नवंबर को निलंबन आदेश जारी कर उन्हें एवं अन्य तहसील अध्यक्षों को निलंबित किया गया। साथ ही जिले के सभी पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
झूठे आरोपों पर कार्रवाई का आरोप
पत्र में जिलाध्यक्ष ने निलंबन की कार्रवाई को झूठे आरोपों पर आधारित बताते हुए कहा है कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। जान-पहचान वाले लोगों के सामने उन्हें अपमान और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से वह स्वयं और जिले के अन्य पटवारी भी आहत हैं।

कलेक्टर से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति
जिलाध्यक्ष ने अपने पत्र के अंतिम हिस्से में कलेक्टर से इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया है। इस पत्र के सामने आने के बाद पटवारी आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच तनाव की गंभीरता उजागर हुई है। अब इस मामले में जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई से प्रदेशभर में बढ़ा आक्रोश
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर से प्रदेशभर में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। पीवी ऐप की व्यावहारिक समस्याओं, वेतन विसंगति और अन्य मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच प्रशासन की निलंबन और नोटिस संबंधी कार्रवाई से विवाद गहराता जा रहा है।
अब बड़ा सवाल: क्या सरकार और प्रशासन पटवारियों की समस्याओं पर संवाद का रास्ता अपनाएंगे या निलंबन और नोटिस की कार्रवाई से आंदोलन और गंभीर होगा?
पत्र में लगाए गए आरोप जिलाध्यक्ष के अपने दावे हैं। प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए। इच्छामृत्यु की मांग को देखते हुए प्रशासन को उनकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।



