
नई दिल्ली। कांग्रेस की केरल इकाई के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मामले में स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। उन्होंने पोस्ट के साथ ही सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए प्रदर्शन और नारेबाजी की भी जांच कराने की अपील की है।
दरअसल, कांग्रेस केरल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। पोस्ट में सीजेआई सूर्यकांत को संबोधित करते हुए लिखा गया था, “डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था संभालना आपके बस की बात नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ले आएंगे जो इसे संभाल सके।”
इस पोस्ट को लेकर वकील विनीत जिंदल ने सीजेआई को शिकायत सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि पोस्ट की तथ्यात्मक और कानूनी परिस्थितियों की जांच की जाए, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मामला वैध राजनीतिक आलोचना के दायरे में आता है या अवमानना की कार्रवाई योग्य है।
अनुच्छेद 129 और अवमानना कानून का दिया हवाला
विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 129 का हवाला दिया है। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को अभिलेख न्यायालय का दर्जा देता है और उसे अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्रदान करता है। शिकायत में अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) के तहत मामले की जांच किए जाने की मांग भी की गई है। वकील का कहना है कि यदि आवश्यक हो, तो सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करे।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन की जांच की मांग
वकील ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य इंडिया ब्लॉक नेताओं की याचिका दायर करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए प्रदर्शन की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायत में यह पता लगाने की बात कही गई है कि क्या किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश किया गया, सुरक्षा संबंधी निर्देशों का उल्लंघन हुआ या अदालत के कामकाज में किसी तरह की बाधा पहुंची।
उन्होंने संबंधित सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश नियंत्रण से जुड़े लॉग, सुरक्षा रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा उनकी जांच करने की मांग की है। हालांकि, शिकायत में उठाए गए आरोपों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
बार एसोसिएशन भी जता चुके हैं आपत्ति
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी सीजेआई के इस्तीफे की मांग से जुड़े बयानों की निंदा की थी। दोनों संगठनों ने ऐसी टिप्पणियों को न्यायपालिका की गरिमा और न्याय प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया था।
SIR के खिलाफ इंडिया ब्लॉक ने निकाला था मार्च
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब इंडिया ब्लॉक ने चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के विरोध में मार्च निकाला था। इसके बाद विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर की थी।
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई घटना को लेकर भी वकीलों ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को इस मामले का उल्लेख किया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मामला मेंशनिंग लिस्ट में शामिल है। भाटिया के न में जवाब देने पर सीजेआई ने उन्हें अगले दिन मामले का उल्लेख करने को कहा।
फिलहाल, वकील विनीत जिंदल की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू किए जाने को लेकर किसी न्यायिक निर्णय की पुष्टि इस विवरण से नहीं होती है।



