RDA की संपत्तियों का होगा डिजिटल रिकॉर्ड, ड्रोन सर्वे और UPIN से आसान होंगी ऑनलाइन सेवाएं

रायपुर, 30 सितंबर 2026। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपनी संपत्तियों और अधोसंरचनाओं के प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ी तकनीकी पहल करने जा रहा है। इसके तहत RDA के पूरे अधिकार क्षेत्र में GIS आधारित एसेट मैपिंग, हाईटेक ड्रोन सर्वे, पुराने रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
इस पहल के तहत दशकों पुराने कागजी रिकॉर्ड, संपत्ति रजिस्टर, लेजर बुक, लेआउट नक्शे, पट्टा और लीज से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। साथ ही मौके की वास्तविक स्थिति से रिकॉर्ड का मिलान करने के लिए ड्रोन के जरिए हाई-रिजॉल्यूशन सर्वे कराया जाएगा।
हर संपत्ति को मिलेगा UPIN
RDA की प्रत्येक संपत्ति और भूखंड को यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (UPIN) दिया जाएगा। यह नंबर संबंधित संपत्ति के डिजिटल रिकॉर्ड और GIS मैप से लिंक रहेगा। इससे किसी संपत्ति से जुड़ी जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।
आगे चलकर इसी डिजिटल सिस्टम के आधार पर नामांतरण, लीज नवीनीकरण, भवन अनुज्ञा और NOC जैसी सेवाओं को ऑनलाइन और अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
डोर-टू-डोर सर्वे भी होगा
परियोजना में सिर्फ हवाई सर्वे ही नहीं होगा, बल्कि संपत्तियों का मौके पर भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। प्रशिक्षित सर्वे टीम घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी जुटाएगी। मोबाइल एप के माध्यम से जियो-टैग्ड फोटो और संपत्ति से जुड़ा डेटा भी रिकॉर्ड किया जाएगा।
इसके बाद मौके से मिली जानकारी का पुराने रिकॉर्ड और ड्रोन से तैयार किए गए नक्शों से मिलान किया जाएगा। इससे संपत्तियों की सीमा, माप और वर्तमान उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
अनधिकृत कब्जों की पहचान में मिलेगी मदद
RDA के मुताबिक, डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से संपत्तियों की स्थिति और रिकॉर्ड की निगरानी आसान होगी। पुराने दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति की तुलना के जरिए अनधिकृत कब्जों और भूमि संबंधी विसंगतियों की पहचान में भी सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा सड़क, नाली, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का GIS आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे इनके रखरखाव और भविष्य की विकास योजनाओं में भी मदद मिलेगी।
छह चरणों में पूरी होगी परियोजना
RDA की यह पूरी परियोजना छह चरणों में लागू की जाएगी। पहले चरण में पुराने दस्तावेजों और नक्शों को स्कैन कर डिजिटल किया जाएगा। इसके बाद ड्रोन सर्वे, डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन और जियो-टैग्ड डेटा संग्रह का काम होगा।
पांचवें चरण में पुराने रिकॉर्ड, ड्रोन सर्वे और भौतिक सत्यापन से मिले डेटा को GIS प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जाएगा। अंतिम चरण में डिजिटल डेटाबेस की सुरक्षित होस्टिंग कर वेब आधारित एसेट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के जरिए संपत्तियों की मॉनिटरिंग और प्रबंधन किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया सुशासन की दिशा में अहम कदम
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि संपत्तियों और अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ड्रोन सर्वे और GIS मैपिंग की पहल से RDA के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों को भविष्य में बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का आधार तैयार होगा।
RDA अध्यक्ष नंद कुमार साहू ने इसे संपत्तियों और योजनाओं के प्रबंधन को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ने कहा कि इसका उद्देश्य नागरिकों को अधिक सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ RDA की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करना है।
RDA के CEO अवनीश कुमार शरण के मुताबिक, ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग, भौतिक सत्यापन और GIS आधारित डेटा एकीकरण से प्राधिकरण के पास संपत्तियों और अधोसंरचनाओं का व्यापक डिजिटल एसेट डेटाबेस तैयार होगा।
नागरिकों से सहयोग की अपील
RDA ने नागरिकों से अपील की है कि अधिकृत सर्वे दल के उनके परिसर में पहुंचने पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं और सर्वे कार्य में सहयोग करें। प्राधिकरण के अनुसार सर्वे में शामिल अधिकृत कर्मचारियों के पास RDA द्वारा जारी पहचान-पत्र (ID Card) होना अनिवार्य रहेगा।



