भारत की 4 कंपनियों पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, ईरान से व्यापार का आरोप

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से कथित संबंधों को लेकर चार भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की सैन्य गतिविधियों, खरीद नेटवर्क और पेट्रोलियम-पेट्रोकेमिकल कारोबार को निशाना बनाने वाले ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने जिन भारतीय कंपनियों को प्रतिबंधित किया है, उनमें पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी, सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतीज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अमेरिका ने इन कंपनियों पर ईरानी मूल के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में कथित रूप से शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
पोर्टईज पार्टनर्स पर पेट्रोकेमिकल आयात में मदद का आरोप
अमेरिकी विदेश विभाग का दावा है कि पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी ने ईरान से भारत में कई खेपों के जरिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में मदद की। विभाग ने कंपनी के दो नामित साझेदारों के तौर पर भारतीय नागरिक इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी का भी उल्लेख किया है।
सदाशिवा ओवरसीज पर 6.9 करोड़ डॉलर के आयात का आरोप
अमेरिका के मुताबिक, सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच विभिन्न कंपनियों से करीब 6.9 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इनमें अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ चुकी कंपनी बोनजोर कमोडिटी एफजेडई भी शामिल बताई गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने आरोप लगाया है कि कंपनी ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, अधिग्रहण, बिक्री, परिवहन या विपणन से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में कथित तौर पर जानबूझकर शामिल रही।
पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृतीज इंफ्रा पर भी कार्रवाई
पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड पर जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी विभाग द्वारा जारी विवरण में कंपनी के निदेशक के रूप में भारतीय नागरिक प्रशांत गर्ग का नाम भी शामिल है।
इसके अलावा प्रकृतीज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भी प्रतिबंधों के दायरे में रखा गया है। अमेरिका का आरोप है कि कंपनी ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच विभिन्न कंपनियों से करीब 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया।
ईरान के ऊर्जा नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
अमेरिका के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के पेट्रोलियम राजस्व पर अंकुश लगाना और उन नेटवर्क को बाधित करना है, जिनके जरिए ईरान की सैन्य गतिविधियों और खरीद व्यवस्था को कथित तौर पर सहायता मिलती है।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत अमेरिका ईरान से जुड़े सैन्य, खरीद और ऊर्जा कारोबार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। फिलहाल अमेरिकी घोषणा पर इन चारों भारतीय कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



