उत्तराखंड में बारिश का कहर: 107 सड़कें बंद, कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी, रेड अलर्ट जारी

देहरादून। उत्तराखंड में पिछले 24 घंटे से जारी मूसलधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव के कारण कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। राज्यभर में 107 संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं, जबकि कई जिलों में एहतियातन स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
बारिश का सबसे अधिक असर ऊधमसिंह नगर के काशीपुर और हरिद्वार जिले के रुड़की में देखने को मिला। काशीपुर में 24 घंटे के दौरान सर्वाधिक 206 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया।
चमोली और कर्णप्रयाग क्षेत्र में भारी बारिश के चलते कई सड़कें और पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भनेरपानी के पास भूस्खलन होने से यातायात करीब साढ़े तीन घंटे तक बाधित रहा। वहीं गढ़वाल मंडल में 20 से अधिक सड़कें बार-बार भूस्खलन की वजह से बंद हो रही हैं।
कुमाऊं मंडल में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर चंपा मंदिर के पास भारी चट्टानें गिरने से चीन सीमा की ओर संपर्क प्रभावित हुआ है। ऊधमसिंह नगर को छोड़कर कुमाऊं के पांच जिलों में 54 सड़कें मलबा और भूस्खलन के कारण बंद हैं। टिहरी जिले में भूस्खलन की चपेट में आने से एक पुराना मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया।
भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चंपावत में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने भारी से अत्यंत भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज बारिश की चेतावनी दी है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और भूस्खलन संभावित इलाकों में जाने से परहेज करें। लगातार बारिश के चलते अलकनंदा, गंगा, पिंडर, काली, सरयू और गौरी नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। हालांकि सभी नदियां फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।



