भारत ने US को बेस देने की खबर पर सरकार की सफाई, जानिए क्या है सच्चाई

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में एक दावा तेजी से फैल रहा था कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए भारत से सहयोग मांगा है और इसके लिए भारतीय सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की बात हो रही है। इस दावे को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और न ही भारत ने किसी देश को अपनी सैन्य सुविधाएं इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और बिना पुष्टि किए ऐसी खबरें साझा करने से बचें।
दरअसल, यह मामला तब सामने आया जब एक वायरल पोस्ट में कहा गया कि भारत और अमेरिका के बीच हुए लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए) के तहत अमेरिका पश्चिमी भारत के तटीय इलाकों में सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। पोस्ट में कोंकण तट के पास समुद्री तैनाती का भी जिक्र किया गया और इसे अमेरिका-ईरान तनाव से जोड़कर पेश किया गया।
हालांकि विदेश मंत्रालय ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि भारत की जमीन या सैन्य ढांचे के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका की ओर से कोई अनुरोध नहीं किया गया है और न ही ऐसी कोई अनुमति दी गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एलईएमओए भारत और अमेरिका के बीच एक लॉजिस्टिक समझौता है। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का सीमित उपयोग कर सकती हैं, जैसे ईंधन भरने, मरम्मत या अन्य आपूर्ति से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए। इसका उपयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के माहौल में इस तरह की झूठी खबरें तेजी से फैल जाती हैं, जिससे लोगों में भ्रम पैदा होता है। ऐसे में सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।



