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अंतर्राष्ट्रीय

IMF ने चीन को चेताया: घरेलू फैसलों का असर दुनिया पर पड़ रहा भारी

बीजिंग :  अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था International Monetary Fund (IMF) ने चीन की मौजूदा आर्थिक नीतियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संस्था का कहना है कि वर्तमान रणनीति न केवल चीन की आंतरिक आर्थिक सेहत को प्रभावित कर रही है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी असंतुलन पैदा कर रही है।

हाल ही में जारी वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में IMF ने संकेत दिया कि चीन को निर्यात-आधारित मॉडल से हटकर घरेलू खपत को बढ़ावा देने वाली नीति अपनानी चाहिए। 18 फरवरी को हुई इस समीक्षा के दौरान कार्यकारी निदेशकों ने चीन के बड़े चालू खाता अधिशेष पर चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि यह स्थिति उसके व्यापारिक साझेदार देशों के लिए चुनौती बन रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर युआन (रेनमिन्बी) के कारण चीनी निर्यात को तो प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल रही है, लेकिन इससे घरेलू मांग दबाव में है और आयात में गिरावट देखी जा रही है। साथ ही, देश में बढ़ते डिफ्लेशन को भी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया गया है।

इससे पहले वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs के विश्लेषकों ने भी चीन की बढ़ती निर्यात क्षमता और उसके संभावित वैश्विक प्रभावों को लेकर आगाह किया था। उनके अनुसार, निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता से वैश्विक बाजारों में असंतुलन बढ़ सकता है।

IMF ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि चीन को संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग और आंतरिक खपत को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए, ताकि आर्थिक संतुलन स्थापित हो सके।

हालांकि, IMF बोर्ड में चीन के प्रतिनिधि झांग झेंगक्सिन ने इन टिप्पणियों से असहमति जताई है। उनका तर्क है कि चीन की हालिया निर्यात वृद्धि उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार क्षमता का परिणाम है, न कि किसी असंतुलित नीति का।

इस बीच, वैश्विक बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजिंग आगे अपनी आर्थिक रणनीति में कोई बदलाव करता है या नहीं।

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Kailash Jaiswal

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