संस्कृत सुभाषित के जरिए पीएम मोदी ने हंसी का समझाया महत्व

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय प्राचीन परंपरा से जुड़ा एक सकारात्मक और प्रेरक संदेश देशवासियों के साथ साझा किया। उन्होंने अपने संदेश में हंसी और मुस्कान को स्वस्थ जीवन का सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संस्कृत श्लोक पोस्ट किया, जिसमें जीवन में हंसी के महत्व को रेखांकित किया गया है। इस श्लोक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हंसना न केवल सबसे उत्तम औषधि है, बल्कि यह बिना किसी खर्च के सहज रूप से उपलब्ध होकर स्वास्थ्य और आनंद दोनों को बढ़ाता है।
पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए इस संदेश के साथ एक संक्षिप्त वीडियो भी जुड़ा था, जिसमें संस्कृत श्लोक का भावार्थ हिंदी और अंग्रेजी में समझाया गया। वीडियो में बताया गया कि नियमित रूप से मुस्कुराना मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर स्वास्थ्य में सहायक होता है।
प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ समय से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे समय-समय पर संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से नैतिक मूल्यों, जीवन दर्शन और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते रहे हैं। वे अपने भाषणों, रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ और सोशल मीडिया के जरिए ऐसे श्लोक साझा करते हैं।
सरकार के अनुसार, इन सुभाषितों के माध्यम से प्रधानमंत्री समाज को भारत की सभ्यतागत विरासत से जोड़ने के साथ-साथ विकास, सुशासन, नैतिकता और सामाजिक संतुलन जैसे विषयों पर भी संदेश देते हैं। उनका मानना है कि प्राचीन ज्ञान आज की चुनौतियों के समाधान में भी मार्गदर्शक भूमिका निभा सकता है।
इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत भाषा की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा है कि यह भाषा भारतीय संस्कृति और मूल्यों की संवाहक है। उन्होंने दूरदर्शन के ‘सुप्रभातम’ जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज को संस्कृति और संस्कार से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।



