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छत्तीसगढ़भाटापारा

श्रीमद् भागवत कथा में बही भक्ति की गंगा, भगवान का नाम ही सबसे बड़ी संपत्ति – पं. हरगोपाल शर्मा

भाटापारा। छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज भवन, कॉलेज गेट, शीतला मंदिर के पास गीताबाई अग्रवाल एवं समस्त गर्ग परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। कथा श्रवण हेतु नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

व्यासपीठ से भाटापारा निवासी कथा वक्ता पंडित हरगोपाल शर्मा ने ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण वाणी में भगवान श्रीहरि की लीलाओं, भक्तों के चरित्र और भागवत महापुराण के गूढ़ रहस्यों को सरल एवं सरस भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “भगवान को भूल जाना ही सबसे बड़ी विपत्ति है और भगवान की स्मृति बनी रहना ही सबसे बड़ी संपत्ति है।”

भागवत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण समस्त वेदों और उपनिषदों का सार है। अनंत जन्मों के पुण्य उदय होने पर ही जीव को भागवत श्रवण का सौभाग्य प्राप्त होता है। भागवत के आश्रय से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति संभव है।

पंडित शर्मा ने कहा कि कलिकाल के समस्त दोषों एवं तीनों तापों का नाश केवल भगवान के नाम से ही संभव है। मनुष्य को हर परिस्थिति में भगवान के नाम का आश्रय लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान किसी को सुख-दुख नहीं देते, यह सब मनुष्य के स्वयं के कर्मों का फल होता है।

कथा प्रसंगों में उन्होंने शुकदेव जी–राजा परीक्षित संवाद, कलियुग के गुण-दोष, भगवान के विभिन्न अवतार, कपिल नारायण–देवहूति संवाद, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत, अजामिल उपाख्यान एवं प्रह्लाद चरित्र का विस्तार से वर्णन किया।

कपिल नारायण के उपदेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा—

  • “मन ही जीव के बंधन और मोक्ष का कारण है। मन को वश में करना वायु को वश में करने के समान दुष्कर है।”
  • अजामिल प्रसंग में उन्होंने कहा कि जिसने एक बार भी सच्चे भाव से भगवान का स्मरण कर लिया, उसके लिए यमदूत भी भय का कारण
  • नहीं बनते। वहीं प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति को नर से नारायण बना सकता है।
  • कथा के दौरान पंडित शर्मा ने मातृशक्ति से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि गर्भावस्था के समय प्रत्येक माता को भगवान की कथा
  • सुननी चाहिए और उत्तम साहित्य का अध्ययन करना चाहिए, जिससे होने वाली संतान पर सकारात्मक संस्कार पड़ते हैं।
  • कथा के मध्य गिरधर महाराज, संजू महाराज एवं गुड़ू भाई द्वारा प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिसे सुनकर श्रोतागण भाव-विभोर हो उठे।
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Kailash Jaiswal

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