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बाल ठाकरे की विचारधारा से दूरी, बदला हिंदुत्व एजेंडा : शिवसेना के भस्मासुर बने संजय राउत?

राकेश राणा | मुंबई : मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। चुनाव में खराब प्रदर्शन को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के भीतर और बाहर यह चर्चा तेज है कि राउत की राजनीतिक रणनीति और कथित तुष्टिकरण एजेंडे ने शिवसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है।

इससे पहले विधानसभा चुनावों में भी शिवसेना (उद्धव गुट) के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद संजय राउत की जमकर आलोचना हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी नेताओं का मानना है कि लगातार चुनावी असफलताओं के पीछे नेतृत्व की रणनीति और मूल विचारधारा से भटकाव एक बड़ी वजह है।
हाल के दिनों में पार्टी ने मराठी भाषा, उत्तर–दक्षिण भारतीयों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन यह दांव भी उल्टा पड़ गया। माना जा रहा है कि इन मुद्दों ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को जोड़ने के बजाय और दूर कर दिया।

शिवसेना के कई नेताओं का आरोप है कि संजय राउत ने पार्टी की मूल हिंदुत्ववादी विचारधारा से हटकर राजनीति की। उनका कहना है कि बाल ठाकरे की आक्रामक और स्पष्ट हिंदुत्व लाइन से दूरी बनाकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन करना कार्यकर्ताओं और समर्थकों को रास नहीं आया।

पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत की जोड़ी ने शिवसेना की पहचान को कमजोर किया है। बाल ठाकरे की विचारधारा से दूरी, बार-बार बदला गया राजनीतिक रुख और गठबंधन की मजबूरियों ने पार्टी को आज इस स्थिति में पहुंचा दिया है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि शिवसेना (उद्धव गुट) को दोबारा मजबूत होना है, तो उसे अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। बाल ठाकरे की विचारधारा, स्पष्ट हिंदुत्व एजेंडा और आक्रामक क्षेत्रीय राजनीति ही कभी शिवसेना की ताकत रही है।

चुनावी हार के बाद अब पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे का रास्ता क्या होगा। क्या शिवसेना अपने पुराने सहयोगी बीजेपी के साथ फिर से हाथ मिलाएगी, या किसी नए राजनीतिक समीकरण की तलाश करेगी?

इन तमाम सवालों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—

  • क्या संजय राउत शिवसेना के लिए भस्मासुर साबित हो रहे हैं?
  • इसका जवाब आने वाले दिनों में शिवसेना की दिशा और दशा तय करेगा।
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Kailash Jaiswal

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