ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा की अनकही कहानी: पहली शूटिंग डे पर क्यों छलक पड़े थे आंसू?

नई दिल्ली : दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाली प्रियंका चोपड़ा का सफर जितना चमकदार दिखता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी रहा है। बरेली में बीता बचपन, 18 साल की उम्र में मिस वर्ल्ड का ताज और फिर फिल्मों की ओर कदम—हर पड़ाव ने उन्हें एक नई दिशा दी।
2000 में मिस वर्ल्ड बनने वाली प्रियंका चोपड़ा उस समय भारत की पांचवीं विजेता थीं। इसी वर्ष लारा दत्ता ने मिस यूनिवर्स और दिया मिर्ज़ा ने मिस एशिया पैसिफिक का खिताब जीतकर भारत का नाम रोशन किया था। प्रियंका ने प्रतियोगिता में अपने आत्मविश्वासी जवाब और व्यक्तित्व से जजों का दिल जीत लिया था।
प्रतियोगिता के दौरान प्रियंका से पूछा गया कि उनके लिए सबसे प्रेरणादायक जीवित महिला कौन है। उन्होंने बिना झिझक ‘मदर टेरेसा’ का नाम लिया और कहा कि उनकी दयालुता और दूसरों के लिए किए गए कार्य उन्हें गहराई से प्रेरित करते हैं। हालांकि मदर टेरेसा उस समय जीवित नहीं थीं, फिर भी प्रियंका का जवाब उनकी सोच और संवेदनशीलता को दर्शाता था, जिसने उन्हें भीड़ से अलग खड़ा कर दिया।
प्रतियोगिता के दौरान उन्हें कई तरह के दबावों का सामना करना पड़ा। एक अवसर पर आयोजकों ने उन्हें ऐसे परिधान पहनने को कहा जिसमें वे सहज नहीं थीं, लेकिन उन्होंने विनम्रता से अपनी बात रखते हुए वही पहना जिसमें वे कम्फर्टेबल थीं। परिवार ने भी इस फैसले में उनका पूरा समर्थन किया।
मिस वर्ल्ड बनने के बाद प्रियंका के लिए फिल्मों के दरवाजे खुल गए, लेकिन शुरुआत आसान नहीं रही। उन्होंने 2002 में तमिल फिल्म ‘थमिजन’ से अभिनय की शुरुआत की और एक साल बाद ‘द हीरो’ से बॉलीवुड में कदम रखा।
प्रियंका ने अपने शुरुआती दिनों की संघर्ष की कहानी एक इंटरव्यू में साझा की थी। उन्होंने बताया कि पहली फिल्मों के दौरान वह लंबे डायलॉग, कैमरा एंगल और तकनीकी प्रक्रियाओं को समझ नहीं पाती थीं। मेकअप टीम द्वारा भारी मेकअप किए जाने के बाद जब वह खुद को आईने में देखतीं, तो पहचान ही नहीं पाती थीं—जिसके कारण कई बार सेट पर उनकी आंखें भर आती थीं।
आज प्रियंका चोपड़ा ग्लोबल स्तर पर स्थापित कलाकार, फिल्म निर्माता और उद्यमी हैं, लेकिन उनका सफर साबित करता है कि सफलता पाना कभी आसान नहीं होता—इसके पीछे संघर्ष, सीख और आत्मविश्वास की लंबी कहानी छिपी होती है।



