सुरक्षा बलों का दबदबा: 65 लाख का इनामी चैतू नतमस्तक, 10 नक्सली हुए सरेंडर

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय और 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने शुक्रवार को आत्मसमर्पण कर दिया। चैतू के साथ कुल 10 नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। सभी पर मिलाकर 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस के अनुसार चैतू दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कई बड़ी घटनाओं में उसकी संलिप्तता रही है। लंबे समय तक वह दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा था। उसके अलावा आत्मसमर्पण करने वालों में सरोज उर्फ डीसीवीएम भी शामिल है, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था। शेष आठ नक्सली विभिन्न एरिया कमेटियों से जुड़े हुए थे। इनमें भूपेश उर्फ सहायक राम, प्रकाश, कमलेश उर्फ झिटरू, जननी उर्फ रयमती कश्यप, संतोष उर्फ सन्नू, नवीन, रमशीला और जयती कश्यप शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे एंटी-नक्सल अभियानों, वरिष्ठ माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा की गारंटी ने नक्सलियों पर गहरा प्रभाव डाला है। पिछले कुछ महीनों में कई बड़े नक्सली संगठन छोड़ चुके हैं, जिससे शेष कैडर हतोत्साहित हुआ और दबाव बढ़ गया।
इन सभी ने पुलिस को राइफल, पिस्तौल, विस्फोटक और गोला-बारूद सहित कई हथियार सौंपे हैं। सरकार की सरेंडर एवं पुनर्वास नीति के तहत इन्हें सुरक्षा, आवास और आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
छत्तीसगढ़ पुलिस के आला अधिकारियों ने इस आत्मसमर्पण को बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। पुलिस के अनुसार, इस वर्ष अब तक 150 से अधिक नक्सली या तो मुठभेड़ में मारे गए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आने वाले समय में और भी नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने की संभावना जताई जा रही है।
बस्तर में नक्सलवाद की पकड़ कमजोर पड़ने के संकेत अब स्पष्ट दिख रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां इसे एक निर्णायक मोड़ मान रही हैं।



