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छत्तीसगढ़ में एनीमिया का खतरा बढ़ा, 61% महिलाएँ खून की कमी से जूझ रहीं

रायपुर |  छत्तीसगढ़ में एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या लगातार गहराती जा रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में हर दस में से छह महिलाएँ सामान्य जीवन में ही एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं, आधी से ज़्यादा गर्भवती महिलाएँ और लगभग दो-तिहाई छोटे बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हैं। पुरुषों में भी लगभग चार में से एक व्यक्ति में खून की कमी पाई गई है।

स्वास्थ्य पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एनीमिया बच्चों में कुपोषण और मातृ मृत्यु दर को बढ़ाने वाला बड़ा कारण है। इससे शरीर में कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। लंबे समय तक इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है।

क्यों बढ़ रहा एनीमिया

  • भोजन में आयरन और विटामिन की कमी
  • बार-बार होने वाला मलेरिया
  • दूषित पानी और पेट के कीड़े
  • लाल रक्त कणों का नष्ट होना
    इन कारणों से हीमोग्लोबिन का स्तर लगातार घटता है और शरीर कमजोर हो जाता है।

विभाग की तैयारी

  • स्थिति को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कई कदम उठाए हैं।
  • जिन मरीजों में खून की कमी पाई जाती है, उन्हें आयरन की दवाएँ दी जा रही हैं।
  • बच्चों को हर छह महीने में कृमि नाशक दवा और विटामिन-ए की खुराक पिलाई जा रही है।
  • आहार में सुधार लाने और महिलाओं को जागरूक करने के लिए ग्राम स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं।

बचाव के तरीके

  • विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार और स्वच्छता से एनीमिया को काफी हद तक रोका जा सकता है।
  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ, गुड़, दालें और मौसमी फल खाएँ।
  • चाय-कॉफी का सेवन कम करें।
  • स्वच्छ पानी पीएँ और खाना लोहे की कढ़ाई में पकाएँ।

 

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Kailash Jaiswal

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