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राजनीति

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07-March-2019
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चैतराम अल्पवास से हुए वापस, भूमिका पर चर्चा करती जनमानस,

कुंभ का समापन हो गया है लोग अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण कर लौटने लगे हैं और कल्पवासी भी अपना कल्पवास पूर्ण कर घर वापसी कर रहें हैं, गौरतलब है कि कुंभ मे कल्पवास करने की परंपरा है जिसके तहत एक महिने तक गंगा किनारे कुटिया मे भगवत भजन करते हुए निवास की परंपरा है जो कुंभ समापन के साथ संपन्न होती है, इस अल्पवास मे घर परिवार से दूर जनमानस भगवान के चरणों मे समय व्यतीत करतें है, कुछ यही माजरा भाटापारा के राजनैतिक परिदृश्य मे नजर आया जब पूर्व विधायक चैतराम साहू ऐन विधानसभा चुनावों के वक्त कांग्रेस का साथ छोड़ जोगी कांग्रेस का दामन थाम लिए एवं चुनाव भी लड़े तथा प्रभावशाली उपस्थिति भी उनके द्वारा दर्ज कराई गयी, जिसे जनमानस द्वारा उनके सक्रिय राजनैतिक पारी की पुनः शुरुआत भी कही गयी, किन्तु इस अल्पवास से उनके घर वापसी की चर्चा ने विभिन्न कयासों को जन्म दे दिया है _________________________ तटस्थ हो गयी थी भूमिका _________________________ गौरतलब है कि 2013का विधानसभा चुनाव पराजित होने के बाद दो बार के विधायक रहे चैतराम का राजनैतिक सफर एक तरह से तटस्थता का रुख अख्तियार कर लिया था और वे सार्वजनिक जीवन से एक तरह से दूरी बनाकर ही चल रहे थे, जबकि उनके राजनीतिक सफर का आंकलन किया जाए तो स्पष्ट रुप से परिलक्षित होता है कि वे पंच से लेकर विधायक तक के सफर मे जमीन से जुड़े नेता की बानगी है _________________________ प्रदेश के मुखिया की आगवानी _________________________ विधानसभा चुनाव के संपन्न होने के साथ ही विभिन्न प्रकार के अटकलों का बाजार गर्म था, प्रदेश मे कांग्रेस की धमाकेदार वापसी के साथ ही अटकलें लगाई जा रही थी कि छुटे साथी फिर जुडेंगे साथ ही साथ चैतराम साहू को लेकर भी चर्चा का बाजार गर्म था, तथा चौक चौराहों मे यही चर्चा हो रही थी कि क्या जिस तरह विधानसभा चुनावों के समय जोगी कांग्रेस के जरिये चैतराम राजनीति मे वापसी की कोशिश किये क्या अब पुनः अपना अल्पवास त्याग कर अपनी राजनीति को मुख्यधारा मे लायेंगे या विश्राम करेंगे और प्रदेश के मुखिया द्वारा अजीत जोगी के गढ़ मे ही उनके और उनके समर्थकों की आगवानी और कांग्रेस मे वापसी कराए जाने से सारे अटकलों पर विराम लग गया किन्तु एक नये अटकल की चर्चा शुरू हो गयी, _________________________ कितना मिलेगा अहमियत _________________________ कांग्रेस की बंफर जीत से तैयार हुई भारी भरकम टीम मे एक से बढकर एक दिग्गज हैं जिन्हे अभी तक उनके कद के के अनुसार स्थान नही मिल पाया है, इसके अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के माध्यम से समय समय पर यह आवाज भी उठ रही है कि संघर्ष के समय साथ छोड़कर जाने वालों और सत्ता के समय वापसी करने वालों को कतई ही उपकृत नही किया जाये, इन्ही हालातों के मद्देनज़र नजर जनमानस मे सवाल उठ रहा है कि क्या चैतराम पुनः अपनी अहमियत बना पायेंगे या महज संख्या मे बढोत्तरी भर बन कर रह जायेंगे, इस संबंध मे कुछ लोगों की राय इसी दिशा मे जाती दिख रही है तो कुछ लोगों का मानना है कि चैतराम जमीन से जुड़े नेता हैं और उनका व्यापक जनाधार है इसलिए उनको नजरअंदाज करना मुश्किल है, वैसे क्षेत्र के लोकप्रिय नेता एवं एक तरह से भाटापारा मे कांग्रेस का चेहरा कहे जाने वाले प्रदेश कांग्रेस सचिव सुशील शर्मा जिनकी चैतराम की राजनैतिक पारी मे अहम योगदान है, उनका कहना है कि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल जी का निर्णय शिरोधार्य एवं सराहनीय है और निश्चित तौर पर चैतराम साहू जी जैसे व्यापक जनाधार वाले नेता के घर वापसी का लाभ लोकसभा चुनाव मे मिलेगा और कांग्रेस मजबूत होगी, चूंकि लोकसभा चुनाव निकट है इसलिए इस परिवर्तन की परीक्षा और चैतराम के भूमिका की समीक्षा भी जल्द हो जायेगी, इसी आधार पर जनमानस इस राजनैतिक परिदृश्य पर निगाह टिकाये हुए है कि आगे क्या होता है

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