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राजनीति

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15-December-2018
Posted Date

पत्रकार खबरीलाल की त्वरित टिप्पणी ::- लड़ाई पद, पावर और प्रतिष्ठा का !

@ नेताओं में यदि आपसी सहमति नहीं बन रही हैं तो हाई कमान किसी आदिवासी नेता को सीएम बना दे।। @ 11 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ समेत चार अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव 2018 के मतगणना हुए जिसमे छग, मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस ने बीजेपी को पटखनी देकर सरकार में काबिज हुए। सबसे आश्चर्य घटनाक्रम छत्तीसगढ़ में हुआ। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने छग में 65 प्लस का टारगेट दिया था। लेकिन चुनाव में ऐसी आंधी चली की अमित शाह का टारगेट छग कांग्रेस पार्टी ने पूरा कर दिया और बीजेपी केवल 15 सीटों में सिमट कर रह गयी। यह लैंडस्लाइड विक्ट्री प्रदेश में भूपेश और टीएस के नेतृत्त्व और कार्यकर्ताओं के अथक मेहनत से ही संभव हो पाया। 15 वर्षों के भाजपा शासन को एक ही झटके में छग की जनता ने उखाड़ फेंका। मतगणना पश्चात कांग्रेस हाई कमान को मप्र, राजस्थान के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी की किसे सीएम बनाया जाए क्यों कि दोनों राज्यों में सीएम पद हेतु केवल दो ही उम्मीदवारों के बीच लड़ाई थी जिसे राहुल गांधी द्वारा सुलझा लिया गया लेकिन जबरदस्त पेंच फंसी छत्तीसगढ़ के सीएम चयन में। वह भी इसलिए क्यों कि छत्तीसगढ़ से 4 दावेदार खड़े हो गए - भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत एवं ताम्रध्वज साहू। ऐसी स्थिति चुनाव के पहले या मतगणना के पहले नहीं थी। उस वक़्त केवल दो ही नाम थे - छग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष सरगुजा नरेश टीएस सिंहदेव। मतगणना पश्चात चरणदास महंत , ताम्रध्वज साहू के साथ एक दो और दावेदार सामने आ गए। शाहिद नन्द कुमार पटेल के बाद भूपेश बघेल और टीएस बाबा की जोड़ी ने कांग्रेस को सींचा और सामंजस्य बनाते हुए कार्यकर्ताओं में एक नई जान फूंकी और विजय दिलवाया। आलाकमान को केवल भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव को ही बुलाकर राजस्थान और मप्र की तरह फैसला करना था। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हाई कमान की गलती या चूक कहें, यहीं पर हुई जिससे मतगणना के 4 दिन बाद भी छग के सीएम के नाम का ऐलान नहीं हो पाया। पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे, छग प्रभारी पीएल पुनिया और छग के चारों कद्दावर नेता के साथ राहुल गांधी की मीटिंग हुई, सोनिया गांधी से भी मुलाकात हुई फिर भी कोई रास्ता नहीं निकला। चारों दावेदार जितना भी मीडिया के सामने आपस मे कुछ न होने की बात करे लेकिन खिचड़ी कुछ अलग ही पक रही थी जिसे स्वयं राहुल गांधी एंड टीम सुलझा नहीं पा रहे थे। 16 दिसंबर 2018 को फिर इन सभी की मीटिंग होने की संभावना है तथा रायपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय में विधायक दल की बैठक पश्चात औपचारिक रूप से सीएम का चेहरा सामने आएगा। क्या प्रदेश / देश से कुर्सी इतनी प्यारी है कि नेतागण अपने महात्त्वकांक्षाओं की बलि नहीं चढ़ा पा रहे थे। उन्हें इतना तो समझना था कि सीएम कोई भी बने पर हम सभी को साथ मिलकर किसानों का दुःख दूर करना है, बिजली बिल आधा करना है, बेरोजगारों को 2500 रुपये महीना भत्ता देना है, शराब मुक्त प्रदेश बनाना है, जनता और कार्यकर्ताओं का काम करना है और विकास की गंगा बहाना है जिससे आगे भी वे सत्ता पर काबिज रह सके।

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