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राजनीति

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15-November-2018
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पत्रकार खबरीलाल विशेष ::- कृति देवी चुनाव लड़ने से पीछे हटी; कवर्धा में होगा अब रोचक मुकाबला ।।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 दिन ब दिन रोचक होते जा रहे हैं। कुछ दिनों पूर्व कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के कारण कवर्धा के राजा योगी राज निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। उन्हें मनाने टीएस बाबा, मोहम्मद अकबर, ममता चंद्राकर राज महल पहुंचे पर बात नहीं बनी। अचानक रानी साहिबा कृति देवी को कवर्धा विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी जंग में लड़ने हेतु भेजा गया, प्रचार प्रसार भी जोर शोर से शुरू हो गया, नाम वापसी का अंतिम दिन भी चला गया, लेकिन 14 नवंबर 2018 को राहुल गांधी के कवर्धा दौरा के पश्चात 15 नवंबर 2018 को कृति देवी ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और अपना समर्थन पूर्ण रूप से कांग्रेस और कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अकबर को देने की बात कही। अब यहां समझने की जरूरत है कि पहले राजा साहब पंडरिया विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा किये, उसके बाद अपने धर्म पत्नी कृति देवी को कवर्धा विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतारा। अब दोनों राजा और रानी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। यह राजनीति समझ से परे है और जनता भी भ्रमित नजर आ रही है। जब चुनाव ही नहीं लड़ना था तो नामांकन क्यों दाखिल किए गए और रानी साहिबा का क्यों प्रचार प्रसार शुरू किया गया। अब सबसे अहम सवाल यह उठता है कि राहुल गांधी से बंद कमरे में क्या चर्चा हुई ? कयास ये लगाए जा रहे हैं कि - राजा साहब लोकसभा के लिए टिकट हेतु यह कदम उठाये हैं या कांग्रेस की सरकार बनने पर किसी महत्त्वपूर्ण निगम, मंडल में रानी साहिबा के लिए अध्यक्ष का पोस्ट या कुछ और... । जो भी हुआ इससे अब कवर्धा विधानसभा में मुकाबला रोचक हो गया है। एक तरफ अकबर तो दूसरी तरफ अशोक साहू। अब देखना यह है कि बाजी कौन मार ले जाता है। अकबर पुराने धुरंधर राजनीतिज्ञ हैं वे भी बिसाद जरूर बिछा लिए होंगे। डॉ रमन सिंह और अभिषेक सिंह का भी प्रतिष्ठा दांव पर लग गया है क्यों कि कवर्धा उनका गृह जिला है और दो विधानसभा है। जनता निगाहें लगाकर बैठी है कि बाप-बेटे की जोड़ी ऐसा कौन सा शतरंज का चाल देंगे कि कवर्धा और पंडरिया विधानसभा उनके झोली में आ जाये। केवल अब 3 दिन ही प्रचार हेतु शेष रह गए हैं और प्रचार थमने के दूसरे दिन ही मतदान होगा। अब पूरे राज्य की निगाहें कवर्धा, पंडरिया, राजनांदगाँव और खरसिया विधानसभा पर लगा हुआ है जहां स्वयं डॉ रमन का प्रतिष्ठा दांव पर है। 11 दिसंबर तक सभी को इंतेजार करना होगा जब ईवीएम खुलेगा। तब तक जय जोहार जय छत्तीसगढ़।

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